LATEST NEWS

  • Bihar News : युवती के साथ लिव इन में रह रहे फाइनेंसकर्मी की संदिग्ध परिस्थिति में हुई मौत, परिजनों ने हत्या का लगाया आरोप
  • Bihar News : युवती के साथ लिव इन में रह रहे फाइनेंसकर्मी की संदिग्ध परिस्थिति में हुई मौत,

  • Bihar News : दिल्ली से मुंगेर पहुंचे तीन संदिग्धों को पुलिस ने किया गिरफ्तार, जाली नोटनुमा कागजात और मोबाइल किया बरामद
  • Bihar News : दिल्ली से मुंगेर पहुंचे तीन संदिग्धों को पुलिस ने किया गिरफ्तार, जाली नोटनुमा कागजात और

  • Bihar Crime : बरबीघा में बड़ी वारदात, दिनदहाड़े दुकान में घुसकर 2 लाख रुपये उड़ा ले गए उचक्के
  • Bihar Crime : बरबीघा में बड़ी वारदात, दिनदहाड़े दुकान में घुसकर 2 लाख रुपये उड़ा ले गए उचक्के

  • Bihar News : मोतिहारी इंजीनियरिंग कॉलेज में रैगिंग को लेकर जमकर हुआ बवाल, दो गुटों में जमकर हुई मारपीट, सोशल मीडिया में वीडियो हुआ वायरल
  • Bihar News : मोतिहारी इंजीनियरिंग कॉलेज में रैगिंग को लेकर जमकर हुआ बवाल, दो गुटों में जमकर हुई

  • Narayani Path
  • गंडक किनारे सड़क निर्माण से बदलेगी उत्तर बिहार की तस्वीर, 73.51 KM लंबे नारायणी पथ से पर्यटन और

MP का चालान, कोडरमा की गिट्टी और बिहार में खपत:एंट्री माफिया और अधिकारियों की साठगांठ के बड़े खेल का पर्दाफाश!

MP के 90 घंटे वाले माइनिंग चालान पर कोडरमा से बिहार के लिए गिट्टी लदे ट्रकों के कई फेरे लगाने का मामला सामने आया है। ड्राइवरों ने पुलिस-खनन अधिकारियों और एंट्री माफियाओं की साठगांठ का बड़ा खुलासा किया है।

Mining challan scam Bihar Jharkhand
MP का चालान, कोडरमा की गिट्टी और बिहार में खपत का बड़का खेल - फोटो : news 4 nation AI

मध्य प्रदेश से जारी ई-परिवहन माइनिंग चालान, झारखंड के कोडरमा स्थित क्रशर क्षेत्रों से गिट्टी की लोडिंग और बिहार के विभिन्न जिलों तक माल पहुंचने की इस पूरी श्रृंखला ने प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि 90 घंटे (पौने चार दिन) की लंबी वैधता वाले एक ही माइनिंग चालान पर एक ही ट्रक कोडरमा से बिहार की मंडियों के बीच कितनी बार आवाजाही कर सकता है और कितनी खेप (ट्रिप) अनधिकृत रूप से पहुंचा सकता है?

एक ही समय, समान माल और मंजिल: सिर्फ वाहन नंबर में बदलाव

News4Nation की जांच पड़ताल में सामने आए दस्तावेजों से एक ही खदान, माल की समान मात्रा और एक ही गंतव्य वाले चालानों का खुलासा हुआ है। उदाहरण के तौर पर, 6 सितंबर 2026 की रात 9:55 बजे जारी माइनिंग चालान (सं. 2610788458) और रात 10:41 बजे जारी दूसरे चालान (सं. 2610788600) में मध्य प्रदेश के मैहर से 28.97 घनमीटर गिट्टी पटना आर-ब्लॉक रेल परियोजना भेजने का ब्योरा दर्ज है। दोनों में 1,350 किमी की दूरी और 90 घंटे की समय-सीमा तय है, लेकिन महज 46 मिनट के अंतर पर जारी इन पासों में केवल वाहनों के नंबर अलग (BR27P5104 और BR27P5204) दर्ज हैं।

कोडरमा रूट बना मुख्य केंद्र, एक ही पास पर बार-बार ढुलाई का आरोप

दस्तावेजों में मध्य प्रदेश से बिहार जाने वाले खनिज परिवहन के मार्ग में कोडरमा बार-बार दर्ज मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर यह आरोप लग रहे हैं कि चालान की लंबी अवधि का फायदा उठाकर फर्जीवाड़े के तहत एक ही चालान पर multiple खेप ढोई जा रही हैं या फिर एक ही वाहन नंबर का इस्तेमाल अलग-अलग ट्रकों में किया जा रहा है। यदि एक ही पास से बार-बार गिट्टी की ढुलाई की जा रही है, तो इससे राज्य सरकार के खनिज राजस्व को भारी नुकसान पहुंचने की सीधी आशंका है।

NSIT
Nsmch

रजौली चेकपोस्ट पर पहले भी पकड़े जा चुके हैं ऐसे मामले

यह मामला केवल कागजी आशंकाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पूर्व में हुई प्रशासनिक जांच में इसकी पुष्टि हो चुकी है। बीते 25 जुलाई को बिहार के रजौली जांच चौकी पर अधिकारियों ने पाया था कि कई वाहनों ने एक ही ई-चालान पर दो से तीन बार टोल प्लाजा पार किया था, जिसके बाद 4 वाहनों पर 31 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया था। इसके अलावा, 23 अगस्त को भी एक ही चालान की वैधता का गलत इस्तेमाल कर कई बार चक्कर लगाने वाले ट्रक को जब्त कर लगभग 10 लाख रुपये का जुर्माना ठोका गया था।

अधिकारियों और 'इंट्री माफिया' के बीच साठगांठ का बड़ा खुलासा

पड़ताल के दौरान गोपनीयता की शर्त पर कुछ ट्रक चालकों ने खुलासा किया कि इस पूरे खेल को चलाने के लिए पुलिस, परिवहन और खनन विभाग के अधिकारियों को प्रति गाड़ी प्रतिमाह का तय 'एंट्री शुल्क' दिया जाता है। चालकों के अनुसार, बिहार में प्रति ट्रक एंट्री चार्ज लगभग ₹2,50,000 प्रति माह है। इस अवैध वसूली और ट्रकों की सुरक्षित पासिंग कराने में नवादा के खनन इंस्पेक्टर और 'शंकर पांडे' नाम के एंट्री माफिया का नाम प्रमुखता से सामने आया है। इसके अलावा सुबोध टाइगर, शिवम तथा झारखंड की तरफ से रतन, राजू और मुन्ना जैसे एंट्री माफियाओं का सिंडिकेट सक्रिय बताया जा रहा है।

टोल कैमरे, जीपीएस और धर्मकांटा से खुलेगी पूरी पोल

चालान के इस दुरुपयोग की निष्पक्ष जांच करना प्रशासनिक स्तर पर बहुत मुश्किल नहीं है। यदि किसी पास में 90 घंटे की अवधि दर्ज है, तो संबंधित वाहन की पूरी आवाजाही का रिकॉर्ड निकाला जा सकता है। एनएचएआई (NHAI) के टोल कैमरों के फुटेज, जीपीएस ट्रैकिंग, धर्मकांटा की वजन पर्चियों और कोडरमा क्रशर के डिस्पैच रजिस्टर का मिलान करके यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि ट्रक ने निर्धारित समय में रजौली टोल कितनी बार पार किया।

महज 24 से 72 घंटे के रिकॉर्ड जांचने से साफ हो जाएगी तस्वीर

इस पूरे सिंडिकेट और फर्जीवाड़े को बेनकाब करने के लिए जांच एजेंसियों को केवल 24 से 72 घंटे के सीसीटीवी और टोल डेटा का विश्लेषण करने की आवश्यकता है। वाहन के पंजीकरण पत्र (RC) के साथ उसके वास्तविक इंजन और चेसिस नंबर का मिलान करते ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि सड़क पर दौड़ रहा ट्रक वही है जिसके नाम से चालान कटा है या एक ही नंबर प्लेट पर कई गाड़ियां चलाई जा रही हैं।

बड़ा सवाल: कब होगी इस अंतरराज्यीय सिंडिकेट की व्यापक जांच?

मध्य प्रदेश से चालान कटने, कोडरमा से माल लोड होने और बिहार में खपत होने के इस पूरे त्रिकोण में 90 घंटे के खेल पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा हुआ है। हालांकि केवल दस्तावेजों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, लेकिन रजौली में पूर्व में पकड़े गए मामलों और चालकों के बयानों को देखते हुए कोडरमा से लेकर बिहार तक फैले इस खनिज परिवहन नेटवर्क की उच्चस्तरीय जांच होना बेहद जरूरी है।

धीरज पराशर की रिपोर्ट