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Bihar Health System:एंबुलेंस में ठूंस-ठूंस कर 17 लोगो को लाया गया अस्पताल, आदेश का हवाला, नियमों की हत्या! अब बचना मुश्किल, DM ने मांगी रिपोर्ट

Bihar Health System: आमतौर पर एंबुलेंस जिसे जिंदगी की सवारी कहा जाता हैमें सीमित संख्या में मरीज और उनके परिजनों को ले जाने का कड़ा नियम होता है। मगर यहां तो पूरा मंजर ही उल्टा दिखा… एंबुलेंस को मानो मिनी बस बना दिया गया।

Order Cited Rules Ignored 17 in Ambulance
एंबुलेंस में ठूंस-ठूंस कर 17 लोगो को लाया गया अस्पताल- फोटो : reporter

Bihar Health System:आमतौर पर एक एंबुलेंस में मरीज और उनके एटेंडेंट के साथ-साथ कितने लोग सफर कर सकते हैं अगर यह सवाल आपसे पूछा जाए तो आप इसकी संख्या 2,4 या 6 तक कहेंगे मगर कटिहार में एक एंबुलेंस में 17 लोगों को ठूंस कर अस्पताल लाया गायकटिहार से सामने आई ये तस्वीर महज लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी की ऐसी कहानी बयां कर रही है जिसमें कानून, नियम और इंसानियत सब एक साथ दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। आमतौर पर एंबुलेंस जिसे  जिंदगी की सवारी  कहा जाता हैमें सीमित संख्या में मरीज और उनके परिजनों को ले जाने का कड़ा नियम होता है। मगर यहां तो पूरा मंजर ही उल्टा दिखा… एंबुलेंस को मानो मिनी बस बना दिया गया।

मामला कटिहार सदर अस्पताल का है, जहां राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आजमनगर से कुपोषित बच्चों को जांच के लिए लाया जा रहा था। नियम के मुताबिक, एक एंबुलेंस में दो बच्चे और उनके परिजन यानी कुल चार से छह लोगों की गुंजाइश होती है। लेकिन यहां तो हद ही पार हो गई सात मासूम बच्चे और उनके दस परिजन, कुल 17 लोग एक ही एंबुलेंस में ठूंस दिए गए।

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इस खौफनाक ओवरलोडिंग ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या इन बच्चों की जान इतनी सस्ती है? क्या नियम-कानून सिर्फ कागजों तक सीमित हैं? या फिर ‘ऊपर से आए हुक्म’ के नाम पर हर जुर्म को जायज ठहराने का खेल चल रहा है? जब इस मामले पर एंबुलेंस ड्राइवर और साथ मौजूद डॉक्टर से जवाब-तलब किया गया, तो दोनों ने गोलमोल जवाब देकर खुद को बचाने की कोशिश की। कभी मजबूरी का हवाला, तो कभी वरीय पदाधिकारी के आदेश की आड़ यानी जिम्मेदारी से बचने का पूरा इंतजाम। हालांकि दबे लफ्जों में उन्होंने ये जरूर कबूल किया कि कहीं न कहीं चूक हुई है।

अब इस पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। जिलाधिकारी ने इसे गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग को जांच के आदेश दे दिए हैं। 


लेकिन बड़ा सवाल अब भी जस का तस है क्या ये जांच सिर्फ खानापूर्ति बनकर रह जाएगी या फिर इस ‘लापरवाही के खेल’ में शामिल लोगों पर कोई सख्त कार्रवाई होगी? कटिहार की ये घटना सिर्फ एक जिले की कहानी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की वो सच्चाई है जहां इलाज के नाम पर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। अब देखना होगा कि इस मामले में इंसाफ होता है या फिर सब कुछ फिर से फाइलों में दफन कर दिया जाएगा।

रिपोर्ट- श्याम कुमार सिंह