दीदी अब हो गई पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम, राज्यपाल आर एन रवि ने ममता कैबिनेट को किया बर्खास्त

N4N Desk :पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर एन रवि ने कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली कैबिनेट को बर्खास्त कर दिया है। इसके साथ ही राज्य में नई सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है....

दीदी अब हो गई पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम, राज्यपाल आर एन रवि

N4N Desk : पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को आए चुनावी नतीजों के बाद उपजा तनाव अब एक बड़े संवैधानिक संकट में तब्दील हो गया है। राज्य के राज्यपाल आर एन रवि ने कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली कैबिनेट को बर्खास्त कर दिया है। विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की प्रचंड जीत के बावजूद ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया था, जिसके बाद राज्यपाल को यह कठोर कदम उठाना पड़ा।


जनादेश के बाद भी इस्तीफे से इनकार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) को करारी हार का सामना करना पड़ा है। स्वयं ममता बनर्जी अपनी पारंपरिक सीट भवानीपुर से चुनाव हार गईं है। बावजूद इसके, मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर धांधली का आरोप लगाते हुए कहा कि वे राजभवन जाकर इस्तीफा नहीं देंगी। उनके इस अड़ियल रुख ने राज्य में शासन के हस्तांतरण को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी थी।

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राज्यपाल ने किया शक्तियों का प्रयोग

मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल आज 7 मई 2026 को समाप्त हो रहा था। संवैधानिक जानकारों के अनुसार, जब कोई मुख्यमंत्री जनादेश खोने के बाद भी पद छोड़ने से इनकार करता है, तो राज्यपाल के पास अनुच्छेद 164 के तहत सरकार को बर्खास्त करने की शक्ति होती है। राज्यपाल आर एन रवि ने इसी संवैधानिक प्रावधान का उपयोग करते हुए कैबिनेट को भंग कर दिया है। राजभवन के इस कदम से अब राज्य में नई सरकार के गठन का आधिकारिक मार्ग प्रशस्त हो गया है।


मई को हो सकता है शपथ ग्रहण

सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा की अगुवाई वाली सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित हो सकता है। यह दिन रविंद्र नाथ टैगोर की जयंती का भी है, जिसे भाजपा एक प्रतीकात्मक और ऐतिहासिक अवसर के रूप में देख रही है। निर्वाचन आयोग ने पहले ही निर्वाचित सदस्यों की सूची राज्यपाल को सौंप दी है, जिससे नई विधानसभा के गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

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सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव और राजनीतिक हलचल

ममता बनर्जी की कैबिनेट बर्खास्त होने के साथ ही उनके और अभिषेक बनर्जी के आवास के बाहर तैनात अतिरिक्त सुरक्षा बलों को हटा लिया गया है, हालांकि प्रोटोकॉल के तहत उन्हें 'Z प्लस' सुरक्षा मिलती रहेगी। दूसरी ओर, भाजपा खेमे में मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर मंथन तेज है, जिसमें शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे चल रहा है। वहीं, टीएमसी ने इस पूरे घटनाक्रम को "लोकतंत्र की हत्या" करार देते हुए सड़कों पर उतरने की चेतावनी दी है।


बिहार की तर्ज पर संवैधानिक हस्तक्षेप

राजनीतिक विश्लेषक इस घटनाक्रम की तुलना 2005 के बिहार संकट से कर रहे हैं, जब सरकार गठन की स्पष्ट स्थिति न होने पर कड़े फैसले लेने पड़े थे। बंगाल में यह स्थिति और भी गंभीर थी क्योंकि यहां स्पष्ट जनादेश के बाद भी निवर्तमान मुख्यमंत्री ने पद छोड़ने से मना कर दिया था। अब सबकी नजरें आगामी 9 मई पर टिकी हैं, जब बंगाल में नई राजनीतिक पारी की औपचारिक शुरुआत होने की संभावना है।