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'क्या यूपी जाने के लिए अब वीज़ा चाहिए?': हाउस अरेस्ट के बाद योगी सरकार पर बरसे मुकेश सहनी

बिहार सरकार के पूर्व मंत्री व वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी अपनी पार्टी के विस्तार को लेकर यूपी दौरे पर है। इसी क्रम में यूपी की सरकार ने उन्हें लखनऊ में हाउस अरेस्ट कर दिया है, जिसको लेकर मुकेश सहनी ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है....

'क्या यूपी जाने के लिए अब वीज़ा चाहिए?': हाउस अरेस्ट के बाद
योगी सरकार पर बरसे मुकेश सहनी- फोटो : देवांशु प्रभात

Patna/Lucknow : विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। मुकेश सहनी ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने उनके पूर्व निर्धारित राजनीतिक कार्यक्रमों से ठीक पहले उन्हें उनके आवास पर नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया है। सोमवार को यूपी के शाहजहांपुर और सहारनपुर में उनके कार्यक्रम होने थे, लेकिन रविवार रात करीब 8 बजे से ही पुलिस ने उनके पूरे आवास को चारों ओर से घेर लिया और उनके बाहर निकलने पर पूरी तरह रोक लगा दी।


प्रशासन की कार्रवाई पर सहनी का तंज- 'यूपी अलग देश है क्या?'

मुकेश सहनी ने प्रशासन की इस कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए सवाल किया कि किस कानूनी आधार पर उन्हें रोका गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि उत्तर प्रदेश भारत का हिस्सा है, तो एक राजनीतिक दल के नेता को अपने समर्थकों और समाज के बीच जाने से क्यों रोका जा रहा है? उन्होंने आगे कहा कि अगर उत्तर प्रदेश कोई अलग देश बन चुका है, तो सरकार साफ-साफ बता दे, अगली बार वे वहाँ जाने के लिए वीज़ा और पासपोर्ट लेकर आएंगे।


आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात, भोजन के लिए भी नहीं निकलने दिया

वीआईपी प्रमुख ने स्थिति को लोकतंत्र के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि उनके आवास के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है, जिससे न तो कोई गाड़ी बाहर जा सकती है और न ही किसी व्यक्ति को आने-जाने की अनुमति है। उन्होंने आरोप लगाया कि रविवार रात को उन्हें भोजन के लिए भी बाहर नहीं निकलने दिया गया। सहनी ने कहा कि वह कोई आतंकवादी या माओवादी नहीं हैं, फिर भी प्रशासन की ओर से केवल यह तर्क देकर उन्हें रोका जा रहा है कि उनके कार्यक्रमों से क्षेत्र की कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।


निषाद समाज की आवाज और आरक्षण की मांग को दबाने की साजिश

मुकेश सहनी ने इस पूरी कार्रवाई को निषाद, मल्लाह, बिंद और कश्यप समाज के अधिकारों को कुचलने तथा निषाद आरक्षण की मांग को दबाने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि आपकी पार्टी पूरी तरह लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से संगठन का विस्तार कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश के कुछ राज्यों में निषाद समाज को आरक्षण का लाभ मिल रहा है, तो उत्तर प्रदेश और बिहार में इसे लागू करने में सरकार को क्या आपत्ति है?


'जेल भेज दो, लेकिन आवाज नहीं दबेगी'- सहनी की दो टूक

उन्होंने साफ किया कि बिंद, सहनी, मल्लाह और कश्यप समाज को डराने और उनकी राजनीतिक आवाज को कमजोर करने की यह कोशिश कभी कामयाब नहीं होगी। लोकतंत्र में जनता के बीच जाना हर नेता का संवैधानिक अधिकार है और इस अधिकार को किसी भी कीमत पर छीना नहीं जा सकता। सहनी ने अंत में ऐलान किया कि चाहे उन्हें जेल भेज दिया जाए या नजरबंद रखा जाए, वे अपने समाज के हक की लड़ाई और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।


देवांशु प्रभात की रिपोर्ट