LATEST NEWS

  • सड़क दुर्घटनाएं रोकने और ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए सरकार सख्त, विकास आयुक्त ने दिए कड़े निर्देश
  • सड़क दुर्घटनाएं रोकने और ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए सरकार सख्त, विकास आयुक्त ने दिए कड़े निर्देश

  • जन सुराज के नवादा जिला प्रभारी का इस्तीफा, पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में प्रत्याशी की हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए सभी पदों से दिया त्यागपत्र
  • जन सुराज के नवादा जिला प्रभारी का इस्तीफा, पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में प्रत्याशी की हार की नैतिक

  • Bihar News : मोकामा में होमगार्ड जवान ने पेश की बहादुरी की मिसाल, गंगा में डूब रही महिला को जान पर खेलकर बचाया
  • Bihar News : मोकामा में होमगार्ड जवान ने पेश की बहादुरी की मिसाल, गंगा में डूब रही महिला

  • छठ महापर्व को लेकर पटना नगर आयुक्त ने किया घाटों का निरीक्षण, बाढ़ से क्षतिग्रस्त सीढ़ियों एवं पोर्टिको की मरम्मत में तेजी लाने के निर्देश
  • छठ महापर्व को लेकर पटना नगर आयुक्त ने किया घाटों का निरीक्षण, बाढ़ से क्षतिग्रस्त सीढ़ियों एवं पोर्टिको

  • Bihar News : बिहार विधान परिषद् चुनाव में RJD को मिली दूसरी कामयाबी, दरभंगा स्नातक चुनाव में अनिल झा ने बीजेपी प्रत्याशी को हराया
  • Bihar News : बिहार विधान परिषद् चुनाव में RJD को मिली दूसरी कामयाबी, दरभंगा स्नातक चुनाव में अनिल

नागा साधुओं को माना जाता है मरा हुआ इंसान! जानें इसके पीछे की मुख्य वजह, सच्चाई जान घूम जाएगा माथा

महाकुंभ में नागा साधुओं की उपस्थिति इस प्राचीन परंपरा का सजीव उदाहरण है। उनकी साधना और त्याग से भरा जीवन धर्म के प्रति उनकी अटूट निष्ठा को दर्शाता है।

नागा साधुओं को माना जाता है मरा हुआ इंसान! जानें इसके पीछे क
नागा साधुओं का रहस्य- फोटो : freepik

Mahakumbh 2025: प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में इस बार साधु-संतों और नागा साधुओं की भारी भीड़ उमड़ी है। नागा साधुओं का जीवन रहस्यमय और अनोखा होता है, जो आमतौर पर बहुत कम देखने को मिलता है। उनकी मृत्यु और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी सामान्य लोगों से भिन्न होती है। आइए, जानते हैं नागा साधुओं के अंतिम संस्कार से जुड़े अनजाने पहलुओं के बारे में।

नागा साधुओं का जीवन और पिंडदान

नागा साधु बनने के लिए व्यक्ति को कठोर तपस्या करनी पड़ती है। इन साधुओं के जीवन की एक अनूठी बात यह है कि वे अपने जीवनकाल में ही अपना पिंडदान कर लेते हैं। हिंदू धर्म में व्यक्ति की मृत्यु के बाद पिंडदान किया जाता है, लेकिन नागा साधु इसके अपवाद होते हैं। वे अपने सांसारिक जीवन को समाप्त मानते हैं और इस कारण से उनका अंतिम संस्कार सामान्य तरीके से नहीं किया जाता।

नागा साधुओं को मुखाग्नि क्यों नहीं दी जाती?

नागा साधुओं का दाह संस्कार नहीं किया जाता है। उनकी मृत्यु के बाद उन्हें समाधि दी जाती है, न कि मुखाग्नि। इसके पीछे यह मान्यता है कि नागा साधु अपने सांसारिक जीवन से पहले ही मुक्त हो चुके होते हैं। उनकी समाधि भूमि या जल में दी जाती है, जिससे उनकी अंतिम विदाई पूरी होती है।

अंतिम विदाई की प्रक्रिया

नागा साधु की मृत्यु के बाद उनके शरीर को स्नान कराकर भगवा वस्त्र पहनाए जाते हैं। इसके बाद शव पर भस्म लगाई जाती है। मंत्रोच्चारण के साथ उन्हें समाधि दी जाती है। समाधि स्थल पर सनातन निशान बना दिया जाता है ताकि उस स्थान का सम्मान किया जा सके और कोई उसे अपवित्र न कर सके।

NSIT
Nsmch

नागा साधुओं का इतिहास

नागा साधुओं का इतिहास आदि गुरु शंकराचार्य से जुड़ा है। उन्होंने नागा योद्धाओं की सेना तैयार की थी, जिनका उद्देश्य धार्मिक स्थलों और ग्रंथों की रक्षा करना था। नागा साधु धर्म के रक्षक माने जाते हैं, और उनके जीवन में शस्त्र और शास्त्र दोनों का महत्व होता है। यह धरोहर आज भी नागा साधुओं के जीवन में स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। महाकुंभ में नागा साधुओं की उपस्थिति इस प्राचीन परंपरा का सजीव उदाहरण है। उनकी साधना और त्याग से भरा जीवन धर्म के प्रति उनकी अटूट निष्ठा को दर्शाता है।