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India opium cultivated: भारत में अफीम की खेती के लिए कैसे मिलता है लाइसेंस? जानें पूरा नियम और प्रक्रिया

India opium cultivated: भारत में अफीम की खेती कहां और कैसे होती है? जानिए लाइसेंस प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेज, नियम और खेती की पूरी जानकारी।

India  opium cultivated
भारत में अफीम उत्पादन का सिस्टम- फोटो : freepik

India  opium cultivated: भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहां सरकार की निगरानी में कानूनी तरीके से अफीम की खेती की जाती है। भारत को दुनिया का ऐसा देश माना जाता है जहां कानूनी रूप से अफीम गोंद यानी ओपियम गम का उत्पादन होता है। इसी अफीम से मॉर्फिन और कोडीन जैसी जरूरी दवाएं बनाई जाती हैं, जिनका इस्तेमाल गंभीर दर्द और कई मेडिकल जरूरतों में किया जाता है।

हालांकि अफीम की खेती सामान्य खेती की तरह नहीं होती। इसके लिए सरकार से लाइसेंस लेना जरूरी होता है और सख्त नियमों का पालन करना पड़ता है। बिना अनुमति अगर कोई व्यक्ति अफीम का एक पौधा भी उगाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

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भारत में कहां होती है अफीम की खेती?

भारत में हर राज्य में अफीम की खेती की अनुमति नहीं है। केंद्र सरकार हर साल कुछ तय इलाकों में ही इसकी खेती की इजाजत देती है।फिलहाल मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में अफीम की खेती की जाती है।  राजस्थान के झालावाड़, चित्तौड़गढ़, कोटा, भीलवाड़ा, प्रतापगढ़ और उदयपुर जिले अफीम उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं। वहीं मध्य प्रदेश के मंदसौर और नीमच जिले भी बड़े उत्पादन केंद्र माने जाते हैं। उत्तर प्रदेश में भी कुछ सीमित क्षेत्रों में इसकी खेती होती है।

अफीम की खेती के लिए लाइसेंस कैसे मिलता है?

अफीम की खेती करने के लिए किसान को सरकार से लाइसेंस लेना पड़ता है। यह लाइसेंस बहुत सीमित संख्या में जारी किए जाते हैं।ज्यादातर मामलों में पुराने किसानों के लाइसेंस का नवीनीकरण किया जाता है। नए लाइसेंस बहुत कम दिए जाते हैं। अगर किसी लाइसेंसधारी किसान की मृत्यु हो जाती है, तो नियमों के अनुसार उसका लाइसेंस परिवार के कानूनी वारिस को ट्रांसफर किया जा सकता है।इसके लिए सरकारी जांच और जरूरी दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। सरकार यह भी तय करती है कि किसान कितनी जमीन पर अफीम की खेती कर सकता है।

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कौन देता है खेती की अनुमति?

अफीम की खेती का पूरा नियंत्रण केंद्र सरकार के पास होता है। इसकी निगरानी वित्त मंत्रालय के अधीन काम करने वाला सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स यानी CBN करता है।सीबीएन का मुख्य कार्यालय मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थित है। हर साल सरकार अफीम नीति जारी करती है, जिसमें खेती से जुड़े नियम, लाइसेंस और उत्पादन की शर्तें तय की जाती हैं।

किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है?

अफीम खेती का लाइसेंस लेने के लिए किसानों को कई जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं।इनमें आधार कार्ड, पहचान पत्र, जमीन के कागजात, खसरा-खतौनी, निवास प्रमाण पत्र, बैंक खाते की जानकारी, पासपोर्ट साइज फोटो और पुराना लाइसेंस शामिल हो सकता है।इसके अलावा अधिकारी खेत का निरीक्षण भी करते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि खेती नियमों के अनुसार हो रही है।

कैसे की जाती है अफीम की खेती?

अफीम की खेती ठंड के मौसम में की जाती है। इसकी बुवाई आमतौर पर अक्टूबर और नवंबर के बीच होती है।किसान पहले खेत की अच्छी तरह जुताई करते हैं और उसमें खाद डालते हैं। करीब 3 से 4 महीने बाद पौधों में फूल आते हैं। फूल झड़ने के बाद डोडे तैयार होते हैं।इन डोडों पर हल्का चीरा लगाया जाता है, जिससे सफेद रंग का तरल निकलता है। यही तरल बाद में जमकर अफीम बनता है। इसके बाद इसे इकट्ठा किया जाता है। सरकार बाद में किसानों से पूरी अफीम खरीदती है।

खेती के दौरान कौन-कौन से नियम होते हैं?

अफीम की खेती करने वाले किसानों को कई सख्त नियमों का पालन करना पड़ता है।किसान तय सीमा से ज्यादा जमीन पर खेती नहीं कर सकते। पूरी उपज सरकार को ही देनी होती है। फसल खराब होने पर तुरंत सूचना देना जरूरी होता है। खेतों की नियमित जांच होती है और अवैध बिक्री करने पर सख्त कार्रवाई की जाती है। नियम तोड़ने पर किसान का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।