रोने को न समझें कमजोरी, यह है शरीर की स्वाभाविक प्रक्रिया, जानिए आंसुओं के पीछे का वैज्ञानिक सच

रोने को न समझें कमजोरी, यह है शरीर की स्वाभाविक प्रक्रिया, ज

N4N Desk : अक्सर रोने वाले व्यक्ति को कमजोर मान लिया जाता है और बचपन से ही 'रोओ मत, मजबूत बनो' जैसी बातें सिखाई जाती हैं। हालांकि, चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों के अनुसार, रोना कोई कमजोरी नहीं बल्कि शरीर और मन को शांत करने की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। जब इंसान अत्यधिक तनाव या परेशानी में होता है, तो उसका शरीर भी बेचैनी, तेज धड़कन और मांसपेशियों में खिंचाव महसूस करता है। ऐसे समय में रो लेने से दबी हुई भावनाएं बाहर निकलती हैं और मन का भारीपन कम हो जाता है।


पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को शांत करता है रोना

वैज्ञानिकों का मानना है कि तनाव के दौरान शरीर का 'स्ट्रेस सिस्टम' पूरी तरह सक्रिय हो जाता है। भावनात्मक रूप से रोने के बाद शरीर का 'पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम' सक्रिय होता है, जो शरीर को वापस आराम और शांति की स्थिति में लाने का काम करता है। रोने से मन की उलझनें शांत होती हैं और व्यक्ति भावनात्मक रूप से खुद को अधिक संतुलित महसूस करने लगता है।


Diarch GO

आंसुओं के जरिए बाहर निकलते हैं स्ट्रेस हार्मोन

शोध के अनुसार, भावनात्मक आंसुओं में तनाव पैदा करने वाले हार्मोन मौजूद होते हैं, जो रोने के दौरान शरीर से बाहर निकल जाते हैं। यही कारण है कि रोने के बाद व्यक्ति को हल्का महसूस होता है और तनाव कम होने से अच्छी नींद आती है। इसके अलावा, किसी भरोसेमंद व्यक्ति के सामने रोने से अपने मन की बात कहना आसान हो जाता है, जिससे लोगों के बीच आपसी भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत होता है।


आंखों को सूखापन और धूल-मिट्टी से बचाते हैं आंसू

आंसू न केवल मानसिक सेहत बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य, खासकर आंखों के लिए बेहद जरूरी हैं। आंसू आंखों की सतह को नम बनाए रखते हैं और पलकें झपकने पर एक सुरक्षात्मक परत बनाते हैं। यह परत आंखों को सूखने से बचाती है और धूल या जलन पैदा करने वाले बाहरी कणों को आसानी से बाहर निकाल देती है। आंख में कुछ चले जाने पर तुरंत आंसू आना शरीर की अपनी सुरक्षा प्रणाली का ही हिस्सा है।


NSIT
Nsmch

रोज रोने का मन करे तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से लें सलाह

तनाव या दुख के समय कभी-कभार रोना पूरी तरह सामान्य और सेहतमंद प्रक्रिया है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति बिना किसी स्पष्ट कारण के रोजाना रोता है, खुद को संभाल नहीं पाता और इसका असर उसके दैनिक काम व रिश्तों पर पड़ने लगा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में किसी डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ (काउंसलर) से परामर्श लेना बेहद आवश्यक होता है।