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Political News: झारखंड राज्यसभा चुनाव में चार वोटों का खेल, नाथवानी की दस्तक से बढ़ी सियासी बेचैनी, तेजस्वी बने सत्ता की शतरंज के किंगमेकर

Political News: झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए हो रहा चुनाव अब महज संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि सियासी गणित, रणनीति और भरोसे की परीक्षा बन गया है।...

Jharkhand RS Poll Tejashwi 4 MLAs Hold the Key to Win
झारखंड राज्यसभा चुनाव में चार वोटों का खेल- फोटो : social Media

Political News: झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए हो रहा चुनाव अब महज संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि सियासी गणित, रणनीति और भरोसे की परीक्षा बन गया है। मुकाबला इसलिए दिलचस्प हो गया है क्योंकि दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं और भाजपा-एनडीए समर्थित उद्योगपति परिमल नाथवानी की एंट्री ने पूरे समीकरण को उलझा दिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नाथवानी बिना मजबूत हिसाब-किताब के मैदान में नहीं उतरे हैं, जबकि कांग्रेस इस पूरी कवायद को "हॉर्स ट्रेडिंग" की संभावित पटकथा बता रही है।

सदन की अंकगणित कहती है कि एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 28 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत है। इंडिया गठबंधन के पास झामुमो, कांग्रेस, राजद और भाकपा-माले को मिलाकर 56 विधायक हैं। कागज पर देखें तो दोनों सीटों पर गठबंधन की जीत तय दिखती है। लेकिन राजनीति केवल गणित नहीं, बल्कि केमिस्ट्री और रणनीति का भी खेल है।

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झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही है, क्योंकि अकेले झामुमो के पास 34 विधायक हैं। असली जंग कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और परिमल नाथवानी के बीच है। यहीं से चार विधायकों का गणित पूरी सियासत का केंद्र बन जाता है।

एनडीए के पास भाजपा, आजसू, जदयू और लोजपा (रामविलास) को मिलाकर 24 विधायक हैं। यानी नाथवानी को जीत के लिए चार अतिरिक्त वोटों की दरकार है। ऐसे में सबसे ज्यादा निगाहें राजद के चार विधायकों पर टिक गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी यादव के चार विधायक इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। यही वजह है कि उन्हें इस चुनाव का किंगमेकर कहा जा रहा है।

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सियासी चर्चाओं को और हवा इसलिए मिल रही है क्योंकि मार्च में बिहार राज्यसभा चुनाव के दौरान महागठबंधन को क्रॉस वोटिंग और अनुपस्थिति का नुकसान उठाना पड़ा था। अब सवाल उठ रहा है कि क्या बिहार की उस सियासी चोट का जवाब झारखंड में दिया जाएगा?सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व भी पूरी तरह सतर्क है। राहुल गांधी और हेमंत सोरेन के बीच लगातार संवाद हुआ है, जबकि राजद को साथ बनाए रखने की कोशिशें भी तेज हैं।

फिलहाल झारखंड की राजनीति में दो राज्यसभा सीटों से ज्यादा चर्चा उन चार वोटों की है, जो किसी की जीत और किसी की हार का फरमान लिख सकते हैं। 18 जून की वोटिंग सिर्फ उम्मीदवारों का भविष्य तय नहीं करेगी, बल्कि यह भी बताएगी कि गठबंधन की राजनीति में भरोसा ज्यादा मजबूत है या सियासी प्रबंधन की कला।