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झारखंड में हाथियों का खूनी तांडव: रामगढ़ में 3 को कुचला, अबतक 3 महीने में 40 लोगों की मौत

झारखंड के रामगढ़ जिले में जंगली हाथियों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। हालिया घटना ने एक बार फिर वन्यजीवों और इंसानों के बीच बढ़ते संघर्ष की खौफनाक तस्वीर पेश की है। पिछले 90 दिनों में हाथियों के हमले में लगभग 40 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं

Elephants rampage in Jharkhand
झारखंड में हाथियों का खूनी तांडव- फोटो : news 4 nation AI

झारखंड के रामगढ़ जिले के गोला क्षेत्र में जंगली हाथियों के एक झुंड ने भारी तबाही मचाई है। हाथियों ने अलग-अलग हमलों में तीन ग्रामीणों को बेरहमी से कुचलकर मार डाला। इस हमले की चपेट में आने से एक महिला भी गंभीर रूप से घायल हुई है, जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा है और लोग घरों से बाहर निकलने में डर रहे हैं।

ईंट भट्ठा कर्मियों पर अचानक हमला

पहली हृदयविदारक घटना गोला वन क्षेत्र के बंदा स्थित एक ईंट भट्ठे पर हुई। सुबह-सुबह तालाटांड निवासी धीरज भुइयां और कुजू निवासी युगल भुइयां शौच के लिए निकले थे। तभी झाड़ियों में छिपे हाथियों के झुंड ने उन पर अचानक हमला बोल दिया। दोनों युवकों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और हाथियों ने उन्हें मौके पर ही कुचल दिया, जिससे उनकी तत्काल मौत हो गई।

महुआ चुनते बुजुर्ग को बनाया निशाना

हाथियों के इसी झुंड ने दूसरी घटना मुरपा गांव में अंजाम दी। यहाँ 70 वर्षीय बुजुर्ग श्यामदेव साव सुबह के वक्त जंगल के पास महुआ चुनने गए थे। हाथियों ने उन्हें घेर लिया और उन पर हमला कर दिया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, लगभग एक दर्जन हाथियों का यह झुंड बोकारो के जंगलों से भटककर रिहायशी इलाकों में दाखिल हुआ है, जो लगातार आक्रामक बना हुआ है।

प्रशासन की कार्रवाई और मुआवजा

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुँची। अधिकारियों ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वन विभाग ने पीड़ित परिवारों को तत्काल सहायता और मुआवजा राशि देने का आश्वासन दिया है। साथ ही, ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है और हाथियों को वापस जंगल की ओर खदेड़ने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

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तीन महीनों में मौत का भयावह आंकड़ा

झारखंड में हाथियों का आतंक केवल रामगढ़ तक सीमित नहीं है। पिछले तीन महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति बेहद चिंताजनक है। जनवरी में पश्चिमी सिंहभूम में एक दंतैल हाथी ने 22 लोगों की जान ली थी, वहीं फरवरी में हजारीबाग में 7 लोगों को हाथियों ने मार डाला था। कुल मिलाकर पिछले 90 दिनों में हाथियों के हमले में लगभग 40 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जो वन प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।