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Chaitra Navratri : झारखंड का रहस्यमयी मंदिर, जहां नवरात्रि में चढ़ती हैं 10,000 बलियां

झारखंड में स्थित मां झालाखंडी का मंदिर आस्था और चमत्कारों का अद्भुत संगम है। मान्यता है कि मां स्वयं धरती से प्रकट हुई थीं और यहां आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता।

jhalkhandi temple

Chaitra Navratri  : चैत्र नवरात्रि का पावन समय चल रहा है। ऐसे में श्रद्धालु मां भगवती के दरबार में पूजा-अर्चना करने पहुंच रहे हैं। झारखण्ड के पलामू जिले में कई आस्था केंद्र हैं, जिनमें एक खास और रोचक स्थान है। चैत्र नवरात्रि के अवसर पर यहां भव्य मेला लगता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु जुटते हैं। पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर से 30 किलोमीटर दूर तरहसी प्रखंड के मझिगांव गांव में माता झालाखंडी का दिव्य दरबार स्थित है। मान्यता है कि यहां मन्नत मांगने पर कोई खाली हाथ नहीं जाता। 


मेले का होता है आयोजन : यहां माता स्वयं धरती से प्रकट हुई थीं। इस मंदिर में न तो कोई प्राण प्रतिष्ठा की गई है और न ही मां की स्थापना की गई है। इसके बावजूद यह स्थान झालाखंडी माता के नाम से प्रसिद्ध है। यहाँ चैत्र नवरात्रि के अवसर पर भव्य मेला लगता है, जो सप्तमी से दशमी तक चलता है। इस मेले में झारखंड, बिहार व अन्य जगहों से लाखों श्रद्धालु आते हैं। श्रद्धालु माता को नारियल, चुनरी व अन्य सामान चढ़ाते हैं और प्रसाद चढ़ाते हैं। इसके बाद मेले का आनंद लेते हैं। मेले में कई तरह के झूले व मीना बाजार भी लगते हैं, जहां लोग खूब खरीदारी करते है 

Diarch GO


पर्यटक स्थल विकसित करने की मांग : मंदिर में पूजा-अर्चना करने आए श्रद्धालु बताते है कि यह अनूठा मंदिर है, जहां माता झालाखंडी का स्वरूप देखने को मिलता है। यहां आने वाले हर श्रद्धालु की मनोकामना पूरी होती है। यहां से शुभ कार्य शुरू करने से सफलता मिलती है। यहां साल भर श्रद्धालुओं का आना लगा रहता है। उन्होंने मांग की कि इस स्थान को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सके और यह स्थान पूरे देश में प्रसिद्ध हो। हालांकि, अब तक सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। 


ऐसे पड़ा झालाखंडी नाम : यह मंदिर करीब 500 साल पुराना है। माता स्वयं धरती के नीचे से प्रकट हुई थीं। शुरू में उनकी मूर्ति छोटी थी, लेकिन अब करीब साढ़े तीन फीट ऊंची हो गई है। उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में यह स्थान घने जंगल से घिरा था, इसलिए मां का नाम झालाखंडी पड़ा। नवमी पर चढ़ाई जाती है बलि पुजारी ने बताया कि यहां आने वाले भक्त मनोकामना पूरी होने पर बलि चढ़ाते हैं। यहां पथिया (बकरे) की बलि देने की परंपरा है। नवमी के दिन 10 हजार से अधिक बलि चढ़ाई जाती है। मां को मुख्य रूप से अगरौटा, नारियल और चुनरी चढ़ाई जाती है।

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