Jharkhand weather: झारखंड में अगले तीन दिन तक रहेही कड़ाके की ठंड, पछुआ हवा और पश्चिमी विक्षोभ का दिखेगा असर

झारखंड में ठंड का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। रांची में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, बुधवार को तापमान में गिरावट दर्ज की गई।

Jharkhand weather: झारखंड में अगले तीन दिन तक रहेही कड़ाके क
झारखंड में हड्डी कंपाने वाली ठंड!- फोटो : social media

Jharkhand weather: झारखंड में अगले तीन दिन तक कड़ाके की ठंड पड़ने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, पछुआ हवाओं और पश्चिमी विक्षोभ के कारण तापमान में लगातार गिरावट हो रही है। न्यूनतम तापमान में दो से तीन डिग्री की और गिरावट हो सकती है, जिससे रात के समय ठंड बढ़ जाएगी। हालांकि, तीन दिन बाद मौसम में बदलाव के संकेत हैं और आकाश में आंशिक बादल छा सकते हैं।

बढ़ता ठंड का प्रकोप

झारखंड में ठंड का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। रांची में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, बुधवार को तापमान में गिरावट दर्ज की गई। रांची का न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो पिछले दिन की तुलना में लगभग तीन डिग्री कम है। लातेहार राज्य का सबसे ठंडा जिला रहा, जहां न्यूनतम तापमान 6.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। तेज हवाओं के कारण रांची में दिन का तापमान भी गिरा, जिससे धूप के बावजूद ठंड महसूस की गई।

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पछुआ हवाओं के प्रभाव

मौसम विभाग के अनुसार, पछुआ हवाएं तापमान में गिरावट का प्रमुख कारण हैं। अगले 24 घंटों में न्यूनतम तापमान में और गिरावट हो सकती है, जिससे ठंड और बढ़ेगी। रात में कनकनी बढ़ने की संभावना है। पश्चिमी विक्षोभ के कारण तीन दिन बाद मौसम में बदलाव की उम्मीद है, जिससे आसमान में बादल छा सकते हैं और तापमान में उतार-चढ़ाव हो सकता है। दिन के समय भी ठंड का एहसास होगा।

पश्चिमी विक्षोभ क्या है?

पश्चिमी विक्षोभ एक मौसम प्रणाली है जो भूमध्य सागर से नमी लाती है। यह नमी भारत के उत्तरी भागों में बारिश और बर्फबारी का कारण बनती है और इसका असर झारखंड जैसे राज्यों में भी देखा जाता है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से तापमान में उतार-चढ़ाव होता है और बादल छाने से ठंड का एहसास बढ़ जाता है। यह प्रणाली ठंड के मौसम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे ठंड और अधिक तीव्र हो जाती है। झारखंड के नागरिकों को अगले कुछ दिनों के लिए गर्म कपड़ों का विशेष ध्यान रखना चाहिए और मौसम के बदलाव के लिए सतर्क रहना चाहिए।

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