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कागजी दावों में चमक रहा शिक्षा मॉडल, जमीन पर बदहाल विद्यालय! 220 बच्चों का भविष्य अधर में, शिक्षक-कमरे और सुरक्षा को तरस रहा जमलकी स्कूल

तीन महत्वपूर्ण कक्षाओं का पूरा जिम्मा सिर्फ एक शिक्षक के कंधों पर है। नियम के अनुसार इन कक्षाओं के लिए कम से कम चार शिक्षकों की जरूरत है, लेकिन व्यवस्था की कमी के कारण शिक्षक भी मजबूरी में जूझ रहे हैं।

Saran School Crisis
कागजों पर शिक्षा का उजाला, जमीन पर बदहाली का अंधेरा!- फोटो : reporter

Bihar School News: सारण से बड़ी खबर सामने आई है, जहां सरकार के गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर बुनियादी सुविधाओं के दावों पर जमीनी हकीकत सवालिया निशान खड़ा कर रही है। मकेर प्रखंड की फुलवरिया पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय जमलकी शिक्षा व्यवस्था की बदहाली की ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, जहां संसाधनों की कमी के बीच बच्चों का भविष्य संघर्ष कर रहा है।सरकार लगातार सरकारी विद्यालयों को सशक्त बनाने, निजी स्कूलों की तर्ज पर सुविधाएं देने और शिक्षा व्यवस्था में बदलाव का दावा करती रही है, लेकिन जमलकी विद्यालय की हालत इन तमाम दावों की पोल खोल रही है। यहां 220 छात्र-छात्राओं का नामांकन है, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए महज छह शिक्षक मौजूद हैं। इनमें चार शिक्षिकाएं और दो शिक्षक शामिल हैं।

सबसे चिंताजनक स्थिति कक्षा छह से आठ तक की पढ़ाई को लेकर है। तीन महत्वपूर्ण कक्षाओं का पूरा जिम्मा सिर्फ एक शिक्षक के कंधों पर है। नियम के अनुसार इन कक्षाओं के लिए कम से कम चार शिक्षकों की जरूरत है, लेकिन व्यवस्था की कमी के कारण शिक्षक भी मजबूरी में जूझ रहे हैं।

विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक मो. जमील अंसारी का कहना है कि कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। स्थानीय विधायक और पंचायत प्रतिनिधियों से भी अतिरिक्त शिक्षक और भवन निर्माण की मांग की गई है।

विद्यालय की इमारत की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। पहली से आठवीं तक की सभी कक्षाएं मात्र चार कमरों में संचालित हो रही हैं। कहीं पहली, दूसरी और तीसरी कक्षा के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जा रहा है, तो कहीं सातवीं और आठवीं के विद्यार्थी एक ही कमरे में पढ़ने को मजबूर हैं।एक ही कमरे में कई कक्षाएं चलने से पढ़ाई का माहौल प्रभावित हो रहा है। शिक्षक चाहकर भी बच्चों को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता पर पड़ रहा है।

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विद्यालय की चारदीवारी भी पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे है। आवारा पशु और बाहरी लोग आसानी से परिसर में प्रवेश कर जाते हैं। अभिभावकों का कहना है कि सरकार के बड़े-बड़े दावे सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं।स्थानीय लोगों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि तत्काल अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति, नए कमरों का निर्माण और चारदीवारी की व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।

रिपोर्ट- धर्मेंद्र