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श्री संकटनाशन गणेश स्तोत्र

संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ करने से विद्यार्थी को विद्या, धनार्थी को धन, संतान की कामना वाले को संतान और मोक्ष की चाहत वाले को गति मिलती है।

Shri Sankatnashan Ganesh Stotra
श्री संकटनाशन गणेश स्तोत्र - फोटो : Hiresh Kumar

श्री गणेश का प्रसिद्ध संकटनाशन स्तोत्र नारद पुराण से उद्धृत है, जिसे मुनि श्रेष्ठ श्री नारद जी ने कहा है। इस स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाले संकट समाप्त हो जाते हैं। इसलिए, इसे श्री संकटनाशन स्तोत्र या सङ्कटनाशन गणपति स्तोत्र के नाम से भी जाना जाता है।

॥ श्री गणेशायनमः ॥

नारद उवाच -

प्रणम्यं शिरसा देव गौरीपुत्रं विनायकम ।भक्तावासं: स्मरैनित्यंमायु:कामार्थसिद्धये ॥1॥


प्रथमं वक्रतुंडंच एकदंतं द्वितीयकम ।तृतीयं कृष्णं पिङा्क्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम ॥2॥


लम्बोदरं पंचमं च षष्ठं विकटमेव च ।सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्ण तथाष्टकम् ॥3॥


नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम ।एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम ॥4॥


द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्य य: पठेन्नर: । न च विघ्नभयं तस्य सर्वासिद्धिकरं प्रभो ॥5॥


विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् । पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥6॥


जपेद्वगणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासै: फलं लभेत् । संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशय: ॥7॥


अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वां य: समर्पयेत ।तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत: ॥8॥


॥ इति श्रीनारदपुराणे संकष्टनाशनं गणेशस्तोत्रं सम्पूर्णम्‌ ॥