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Justice Yashwant Varma News: सरकारी आवास के स्टोररूम में मिले थे नोट, संसदीय समिति ने माना दोषी

संसद की जांच समिति ने पूर्व जज जस्टिस यशवंत वर्मा पर लगे तीनों गंभीर आरोपों को सही पाया है। सरकारी आवास में मिले बेहिसाब नोटों के स्रोत और सबूतों से छेड़छाड़ के मामले में समिति ने उन्हें दोषी माना है। पूरी रिपोर्ट दोनों सदनों में पेश कर दी गई है।

Parliament Inquiry Committee Report High Court Judge Justice
पूर्व जज यशवंत वर्मा पर लगे तीनों आरोप सही, संसद समिति की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा!- फोटो : news 4 nation

जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ लगे तीनों गंभीर आरोपों को संसद की जांच समिति ने सही पाया है। यह पूरा मामला वर्ष 2025 में उनके सरकारी आवास के स्टोररूम से भारी मात्रा में अधजले नोट मिलने से जुड़ा है। समिति की यह विस्तृत रिपोर्ट बुधवार, 12 अगस्त को लोकसभा और राज्यसभा के पटल पर पेश की गई। रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस वर्मा स्टोररूम में मिली बेहिसाब नकदी के स्रोत, मालिकाना हक या उसकी मौजूदगी का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। गौरतलब है कि वह इसी साल अप्रैल में हाई कोर्ट के जज पद से इस्तीफा दे चुके हैं।


सरकारी आवास में आग लगने के बाद सामने आया था मामला

यह मामला 14 अगस्त 2025 का है, जब जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास में अचानक आग लग गई थी। आग बुझाने पहुँचे दमकल कर्मियों और पुलिस अधिकारियों को स्टोररूम में बोरियों और बंडलों में भरे ₹500 के अधजले नोट मिले थे। दिल्ली फायर सर्विस के कर्मचारी अंकित सहगल के अनुसार, नोटों के बंडल स्टोररूम में 7-8 फीट के दायरे में फैले हुए थे। पुलिस अधिकारियों ने भी माना कि वहां मिली रकम ₹5 लाख से कहीं अधिक थी।

पहला आरोप: बड़ी मात्रा में बेहिसाब कैश मिलने की पुष्टि

समिति ने अपने पहले निष्कर्ष में पाया कि जस्टिस वर्मा के आवास पर बेहिसाब नकदी मौजूद थी। हालांकि, घटना के बाद नोटों की आधिकारिक गिनती नहीं की गई, न ही उन्हें जब्त कर नमूने सुरक्षित रखे गए। इस लापरवाही के कारण समिति नकदी के सटीक आंकड़े का निर्धारण तो नहीं कर सकी, लेकिन गवाहों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर बड़ी मात्रा में कैश मौजूद होने के पहले आरोप को पूरी तरह साबित माना गया।


दूसरा आरोप: घटना के बाद सबूतों से हुई छेड़छाड़

जांच समिति ने अपने दूसरे आरोप में पाया कि आग बुझने के तुरंत बाद स्टोररूम को सील नहीं किया गया था। सुरक्षा अधिकारियों ने रात करीब 3 बजे जस्टिस वर्मा के स्टाफ को स्टोररूम की सफाई करते और जला हुआ सामान बाहर निकालते देखा। सुबह तक कमरे को साफ कर दिया गया और वहां मिले नोटों को सुरक्षित नहीं रखा गया, जिसके कारण वे बाद में बरामद नहीं हो सके। समिति ने माना कि इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की गई।

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तीसरा आरोप: जस्टिस वर्मा के जवाब पाए गए भ्रामक और असंतोषजनक

तीसरे आरोप के तहत समिति ने जस्टिस वर्मा के बयानों का विश्लेषण किया। शुरुआत में उन्होंने कैश के बारे में अनभिज्ञता जताई, लेकिन बाद में इसे साजिश के तहत रखा गया या नकली नोट होने का दावा किया। हालांकि, इन दावों के समर्थन में कोई शिकायत, FIR या ठोस सबूत पेश नहीं किया गया। जस्टिस वर्मा ने खुद गवाही देने से परहेज किया और न ही अपने परिवार या स्टाफ को गवाह के तौर पर पेश किया, जिससे समिति ने उनके बयानों को टालमटोल वाला और भ्रामक माना।

साक्ष्यों के अभाव के बावजूद समिति ने माना दोषी

संसदीय समिति की रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रशासनिक स्तर पर शुरुआती जांच और सबूतों को सुरक्षित रखने में गंभीर लापरवाहियां बरती गईं। इसके बावजूद, फायर सर्विस, पुलिस कर्मचारियों की गवाही और घटनाक्रम की परिस्थितियों को देखते हुए समिति ने माना कि एक संवैधानिक पद पर रहते हुए जस्टिस वर्मा का आचरण अनुचित था और उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोप कानूनी व नैतिक रूप से पूरी तरह सिद्ध होते हैं।