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CBSE Controversy : OSM विवाद के बीच केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, CBSE के चेयरमैन और सचिव का किया तबादला, जांच के लिए कमिटी का हुआ गठन

CBSE Controversy : लगातार बढ़ते विवादों, आंतरिक अव्यवस्था और छात्रों के भारी आक्रोश के बीच सरकार ने नए आदेश जारी करते हुए सीबीएसई के अध्यक्ष और सचिव का तबादला कर दिया है।

CBSE Controversy : OSM विवाद के बीच केंद्र सरकार का बड़ा फैसल
हटाये गए चेयरमैन और सचिव - फोटो : SOCIAL MEDIA

New Delhi : देश की सबसे बड़ी स्कूली परीक्षा संस्था, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को लेकर केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा और सख्त फैसला लिया है। लगातार बढ़ते विवादों, आंतरिक अव्यवस्था और छात्रों के भारी आक्रोश के बीच सरकार ने नए आदेश जारी करते हुए सीबीएसई के अध्यक्ष और सचिव दोनों का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया है। परीक्षाओं के प्रबंधन, कॉपियों के मूल्यांकन की डिजिटल प्रक्रियाओं में आ रही गंभीर तकनीकी व व्यावहारिक दिक्कतों के बाद जवाबदेही तय करने के मद्देनजर इस प्रशासनिक कदम को बेहद अहम माना जा रहा है।

पीएम मोदी के हस्तक्षेप के बाद गिरी गाज

सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद नीट पेपर लीक मामले और सीबीएसई के ऑनलाइन इवैल्यूएशन सिस्टम में आ रही गड़बड़ियों पर लगातार नजर बनाए हुए थे। पीएमओ के सीधे हस्तक्षेप और कड़े रुख के बाद ही बोर्ड के इन दोनों शीर्ष अधिकारियों को उनके पदों से हटाया गया है। बताया जा रहा है कि सरकार ने यह फैसला सीबीएसई की कॉपियों को जांचने और रिजल्ट जारी होने के बाद की प्रक्रियाओं पर कई हफ्तों तक चली एक उच्च स्तरीय गोपनीय जांच के बाद लिया है। इस पूरे विवाद के कारण पिछले कई हफ्तों से देश भर के लाखों छात्र, अभिभावक और शिक्षक बेहद परेशान और चिंतित थे।

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नतीजों के बाद शुरू हुआ था बड़ा विवाद

दरअसल, इस साल सीबीएसई कक्षा 10वीं और 12वीं के परिणाम घोषित होने के बाद से ही विवाद की शुरुआत हुई थी। बड़ी संख्या में छात्रों ने अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं को ऑनलाइन देखने के दौरान गंभीर समस्याओं की शिकायत दर्ज कराई थी। उम्मीदवारों का दावा था कि उन्हें जो आंसर शीट डाउनलोड करने के लिए मिलीं, वे काफी धुंधली थीं, कई कॉपियों से महत्वपूर्ण अनुभाग पूरी तरह गायब थे और बोर्ड की ऑनलाइन वेबसाइट व सेवाएं ठीक से काम नहीं कर रही थीं। इसके बाद डिजिटल इवैल्यूएशन के लिए इस्तेमाल होने वाले ओएसएम प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

डिजिटल सिस्टम (OSM) और डेटा सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

यह पूरा मामला सिर्फ कॉपियों की धुंधली तस्वीरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ऑनलाइन मूल्यांकन करने वाले डिजिटल सिस्टम की पारदर्शिता को लेकर भी बड़ा विवाद खड़ा हो गया। शिक्षा जगत और सोशल मीडिया पर लोगों ने इस बात को लेकर कड़े सवाल उठाए कि जिस निजी कंपनी को करोड़ों छात्रों की कॉपियां जांचने का टेंडर या कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था, उसका चयन किस आधार पर हुआ था? इसके साथ ही छात्रों के पर्सनल डेटा, रोल नंबर और उनके मार्क्स की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर भी गंभीर आशंकाएं जताई गईं।

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री-चेकिंग में देरी से बढ़ा था असंतोष

परिणामों में विसंगति के बाद जिन छात्रों ने स्क्रूटनी या दोबारा कॉपी जांचने के लिए आवेदन किया था, उस प्रक्रिया में भी बोर्ड की तरफ से भारी ढुलमुल रवैया और देरी देखने को मिली। इस सुस्ती ने छात्रों के भविष्य को अधर में लटका दिया था, जिससे बोर्ड के खिलाफ असंतोष चरम पर पहुंच गया। अब सरकार द्वारा अध्यक्ष और सचिव पर की गई इस बड़ी कार्रवाई के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि सीबीएसई की आंतरिक व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा और कॉपियों की री-चेकिंग के काम में तेजी लाते हुए छात्रों की सभी तकनीकी शिकायतों का जल्द से जल्द निपटारा किया जाएगा।