Rafale Fighter Deal : भारतीय सेना का 'मेगा प्लान', 3.25 लाख करोड़ में खरीदे जाएंगे 114 राफेल और 6 पोसीडॉन विमान, ड्रैगन और पाकिस्तान की बढ़ेगी बेचैनी

Rafale Fighter Deal : भारत ने 114 राफेल खरीदने का निर्णय लिया है. साथ ही 6 पोसीडॉन विमान भी खरीदे जायेंगे......पढ़िए आगे

Rafale Fighter Deal : भारतीय सेना का 'मेगा प्लान', 3.25 लाख
राफेल खरीदने का निर्णय - फोटो : SOCIAL MEDIA

New Delhi : भारत की सैन्य शक्ति को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने एक अभूतपूर्व निर्णय लिया है। परिषद ने भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों और नौसेना के लिए 6 P-8I पोसीडॉन समुद्री निगरानी विमानों की खरीद को हरी झंडी दे दी है। लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस सौदे को देश के रक्षा इतिहास की सबसे बड़ी खरीद योजनाओं में से एक माना जा रहा है, जो हिंद महासागर से लेकर हिमालय की चोटियों तक भारत की सुरक्षा को 'फुलप्रूफ' बनाएगा।

इस सौदे का प्राथमिक उद्देश्य भारतीय वायुसेना में लड़ाकू विमानों की घटती संख्या के संकट को दूर करना है। वर्तमान में वायुसेना के पास लगभग 30 स्क्वाड्रन हैं, जो स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन की संख्या से काफी कम है। 114 नए राफेल विमानों के शामिल होने से वायुसेना को 6 से 7 नए स्क्वाड्रन मिलेंगे, जिससे चीन और पाकिस्तान जैसे दोहरे मोर्चों पर भारत की हवाई मारक क्षमता और युद्धक तैयारी को जबरदस्त मजबूती मिलेगी। अत्याधुनिक तकनीक से लैस ये विमान दुश्मन के रडार को चकमा देने और सटीक निशाना लगाने में माहिर हैं।

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आसमान के साथ-साथ समंदर में भी भारत अपनी निगरानी क्षमता को कई गुना बढ़ाने जा रहा है। रक्षा परिषद ने नौसेना के बेड़े में 6 नए P-8I पोसीडॉन एयरक्राफ्ट जोड़ने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई है। भारतीय नौसेना पहले से ही 12 ऐसे विमानों का सफल संचालन कर रही है, लेकिन हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सामरिक हलचल को देखते हुए यह विस्तार अनिवार्य माना जा रहा था। इन विमानों के आने से लंबी दूरी की समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी (एंटी-सबमरीन) क्षमताओं में अभूतपूर्व इजाफा होगा।

रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह सौदा केवल हथियारों की खरीद नहीं है, बल्कि हिंद महासागर और दक्षिण एशिया में भारत के प्रभुत्व को सुरक्षित करने का एक मास्टरस्ट्रोक है। P-8I विमान न केवल समुद्री डकैती और अवैध घुसपैठ को रोकने में सहायक हैं, बल्कि वे समुद्र के भीतर छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाकर उन्हें नष्ट करने की क्षमता भी रखते हैं। राफेल और पोसीडॉन की यह संयुक्त शक्ति भारत की रक्षा दीवार को अभेद्य बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम साबित होगी।

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प्रक्रिया के अगले चरण में, डीएसी की मंजूरी के बाद अब इस विशाल प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास भेजा जाएगा। सीसीएस से मुहर लगने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुबंध की औपचारिकताओं को पूरा किया जाएगा। सरकार का यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि भारत अपनी संप्रभुता और सुरक्षा व्यवस्था से कोई समझौता नहीं करने वाला है और अपनी सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।