Bihar News: कोर्ट ने एसपी को भेजा नोटिस, आदेश की अनदेखी पर सख्त रुख

Bihar News: अदालत ने सम्मन और वारंट का तामिला नहीं होने को गंभीरता से लेते हुए रोहतास के एसपी को कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।

Rohtas SP Faces Notice Over Non Service of Court Warrants

Bihar News: भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले में अभियोजन गवाहों को अदालत के आदेश के बावजूद पेश नहीं कराए जाने पर पटना सिविल कोर्ट की निगरानी की विशेष अदालत ने सख्त रुख अख्तियार किया है। अदालत ने सम्मन और वारंट का तामिला नहीं होने को गंभीरता से लेते हुए रोहतास के एसपी को कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।

मामला भ्रष्टाचार से जुड़े एक पुराने प्रकरण का है, जिसमें आरोपित के खिलाफ वर्ष 2015 में आरोप गठित किया गया था। इसके बाद मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के गवाहों को अदालत के समक्ष पेश कराने के लिए लगातार प्रयास किए गए। गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए विशेष अदालत की ओर से सम्मन जारी किया गया।जब इसके बावजूद गवाह अदालत में उपस्थित नहीं हुए तो अदालत ने आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत जमानतीय वारंट और गैर-जमानतीय वारंट तक जारी किया। इसके बावजूद इन आदेशों का अपेक्षित तरीके से तामिला नहीं होने पर अदालत ने नाराजगी जताई है।

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कोर्ट के आदेश की अनदेखी पर सख्त रुख

निगरानी के विशेष लोक अभियोजक डॉ. श्रद्धानंदन पासवान के अनुसार, भ्रष्टाचार मामले के आरोपित के खिलाफ 30 अक्टूबर 2015 को आरोप गठित किया गया था। अभियोजन गवाहों को अदालत में पेश कराने के लिए विशेष अदालत ने पहले सम्मन भेजा। इसके बाद भी जब गवाह पेश नहीं हुए तो अदालत ने जमानतीय वारंट और फिर गैर-जमानतीय वारंट जारी किया।लेकिन इन आदेशों के बावजूद गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हो सकी। इसी मामले को लेकर अदालत ने अब रोहतास एसपी से जवाब तलब करने की प्रक्रिया शुरू की है।

एसपी को बताना होगा क्यों नहीं हुआ तामिला

विशेष अदालत के आदेश के बाद रोहतास एसपी को यह स्पष्ट करना होगा कि अदालत की ओर से जारी सम्मन और वारंट का तामिला क्यों नहीं कराया गया और अभियोजन गवाहों को अदालत के समक्ष पेश करने में क्या अड़चन रही।अदालत के इस कदम को न्यायिक प्रक्रिया के अनुपालन को लेकर सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है। आपराधिक मामलों में अभियोजन गवाहों की समय पर पेशी सुनवाई को आगे बढ़ाने के लिए अहम होती है। यदि गवाह अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं होते हैं तो मुकदमे की कार्यवाही प्रभावित होती है और न्याय मिलने में भी देरी हो सकती है।

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2015 से चल रहा है मामला

इस मामले में आरोपित के खिलाफ करीब एक दशक पहले 30 अक्टूबर 2015 को आरोप गठित किया गया था। इसके बाद से मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के गवाहों को अदालत में पेश कराने की कवायद जारी रही।अदालत की ओर से सम्मन के बाद जमानतीय और गैर-जमानतीय वारंट जारी किए जाने के बावजूद यदि गवाहों की पेशी नहीं होती है तो यह न्यायिक आदेश के अनुपालन का गंभीर सवाल बन जाता है। इसी वजह से निगरानी की विशेष अदालत ने अब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी से जवाब मांगने का फैसला लिया है।अब देखना होगा कि रोहतास एसपी की ओर से अदालत के कारण बताओ नोटिस पर क्या जवाब दिया जाता है और अभियोजन गवाहों को अदालत में पेश कराने के लिए आगे क्या कार्रवाई की जाती है। मामले की अगली कार्यवाही पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं।