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राजधानी की हाईटेक पुलिस हो गई फेल! सेक्स रैकेट का विरोध करने पर बंटी पटना से अगवा, CCTV था, सुराग थे... फिर भी नहीं बची बंटी की जान , तफ्तीश पर उठ रहे ये संगीन सवाल

Patna Bunty Yadav Murder Case: सेक्स रैकेट का विरोध करने पर राजधानी की पुलिस के नाक के नीचे से युवक का अपहरण कर लिया जाता हैं। सीसीटीवी में अपराधी भी दिख रहे हैं लेकिन पटना की हाईटेक पुलिस कार्रवाई का भोंपू बजाती रही और युवक की सड़ी गली लाश बरामद..

Patna Station Abduction to Murder CCTV Captures Bunty Final
CCTV था, सुराग थे... फिर भी नहीं बची बंटी की जान- फोटो : social Media

Patna Crime:  राजधानी पटना से सरेशाम हुए बंटी यादव के अपहरण और पांच दिन बाद अथमलगोला में मिली उनकी लाश ने कानून-व्यवस्था पर कई संगीन सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस वारदात की तस्वीरें सीसीटीवी कैमरे में कैद थीं, जिसमें कथित तौर पर अपहरण करने वाले चेहरे और घटनाक्रम सामने था, उसी मामले में बदमाश पुलिस की पकड़ से दूर रहे और आखिरकार युवक की लाश करीब 60 किलोमीटर दूर नेशनल हाईवे किनारे बरामद हुई। इस हत्याकांड ने पुलिस की शुरुआती कार्रवाई, तफ्तीश की रफ्तार और अपराधियों तक पहुंचने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

6 जुलाई की रात पटना जंक्शन स्थित महावीर मंदिर के पास बंटी यादव दही खरीदने पहुंचे थे। तभी कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट की और कथित तौर पर जबरन उन्हें ऑटो में बैठाकर ले गए। बाद में उन्हें दूसरी गाड़ी में शिफ्ट किए जाने की बात भी सामने आई। पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हुई, लेकिन इसके बावजूद अपहरण में शामिल कथित आरोपियों तक पुलिस समय रहते नहीं पहुंच सकी।

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मामले का पहला बड़ा सवाल यही है कि जब अपहरण का वीडियो मौजूद था, संदिग्धों की गतिविधियां रिकॉर्ड थीं और परिजनों ने शुरुआती दौर में ही पुलिस को सूचना दे दी थी, तब तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हुई? अगर शुरुआती घंटों में तकनीकी और जमीनी स्तर पर घेराबंदी होती, तो क्या बंटी को जिंदा बरामद किया जा सकता था? यह सवाल अब परिजन ही नहीं, स्थानीय लोग भी उठा रहे हैं।

दूसरा सवाल यह है कि अपहरण के बाद बंटी को पहले ऑटो और फिर दूसरी गाड़ी में ले जाए जाने की जानकारी सामने आई, लेकिन पुलिस कथित तौर पर उस दूसरी गाड़ी की पहचान भी समय पर नहीं कर सकी। शहर में जगह-जगह लगे कैमरों और निगरानी व्यवस्था के बावजूद अपहरणकर्ताओं का रूट कई दिनों तक साफ नहीं हो पाया। बाद में पुलिस ने 70 से 80 सीसीटीवी फुटेज खंगालने की बात कही, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

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11 जुलाई को अथमलगोला थाना क्षेत्र में मोकामा-बख्तियारपुर फोरलेन किनारे जब शव मिला तो उसकी हालत रूह कंपा देने वाली थी। चेहरा बुरी तरह कुचला हुआ था, शरीर पर चोट के गहरे निशान थे और शव सड़ने लगा था। प्रथम दृष्टया शव कई दिन पुराना प्रतीत हुआ। इससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि अपहरण के कुछ ही समय बाद हत्या कर शव को सुनसान इलाके में ठिकाने लगाया गया होगा। हालांकि मौत का सही समय और कारण पोस्टमार्टम तथा फॉरेंसिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

परिजनों का आरोप है कि बंटी स्थानीय स्तर पर कथित अवैध गतिविधियों और देह व्यापार का विरोध करते थे। उनका कहना है कि करीब 15 दिन पहले इसी मुद्दे पर एक व्यक्ति से विवाद हुआ था और उन्हें धमकी भी मिली थी। परिवार का दावा है कि इन पहलुओं की जानकारी पुलिस को दी गई थी, लेकिन संदिग्धों तक समय रहते पहुंचने में सफलता नहीं मिली। इन आरोपों की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है और अभी इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

मामले में एक ऑटो चालक की गिरफ्तारी हुई है। पुलिस के अनुसार उससे पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं। वहीं, अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। एसडीपीओ-1 रामकृष्ण के मुताबिक, शव मिलने के बाद एफएसएल टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं और आसपास के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में उस इलाके में दो पुलिस टीओपी स्थापित किए जाएंगे ताकि ऐसे सुनसान इलाकों में निगरानी बढ़ाई जा सके।

बंटी यादव हत्याकांड अब सिर्फ एक अपहरण और हत्या का मामला नहीं रह गया है। यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या शुरुआती घंटों में और अधिक तेज, समन्वित और प्रभावी कार्रवाई से इस वारदात का अंजाम अलग हो सकता था। इन सवालों के अंतिम जवाब जांच पूरी होने और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएंगे, लेकिन फिलहाल यह मामला पुलिस की कार्यप्रणाली और अपराध नियंत्रण की चुनौतियों पर गंभीर बहस जरूर खड़ी कर रहा है।