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Bihar Crime:अब होगा अनंत सिंह के करीबी का हिसाब! 12 साल बाद शिकंजे में AK 47 वाला कुख्यात भोला सिंह, दो कारोबारियों के कत्ल का हर राज उगलवाएगी पुलिस

Bihar Crime: बारह साल पहले जिस डबल मर्डर ने बिहार से लेकर पश्चिम बंगाल तक सनसनी फैला दी थी, उस खूनी फाइल की धूल अब फिर उड़ने लगी है।...

Patna AK 47 Don Bhola Singh
अब होगा अनंत सिंह के करीबी का हिसाब! - फोटो : social Media

Bihar Crime: बारह साल पहले जिस डबल मर्डर ने बिहार से लेकर पश्चिम बंगाल तक सनसनी फैला दी थी, उस खूनी फाइल की धूल अब फिर उड़ने लगी है। कोलकाता के कारोबारी सुखदेव दास और उनके सहयोगी विश्वजीत मंडल के अपहरण, फिरौती और बेरहमी से कत्ल के आरोपी कुख्यात भोला सिंह को अब पटना पुलिस रिमांड पर लेकर उसके गुनाहों का पूरा हिसाब-किताब करने की तैयारी में है। पुलिस की नजर सिर्फ एक केस पर नहीं, बल्कि उन तमाम राज़ों पर है जो वर्षों से खामोश फाइलों में दफ्न पड़े हैं।पुलिस के मुताबिक पंडारक, बाढ़, एसकेपुरी, गांधी मैदान, एनटीपीसी, लखीसराय समेत नौ थानों में दर्ज हत्या, अपहरण, आर्म्स एक्ट और रंगदारी के मामलों में भोला सिंह से पूछताछ होगी। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि रिमांड के दौरान कई ऐसे चेहरे भी बेनकाब हो सकते हैं, जिन्होंने इस खूनी नेटवर्क को पनाह दी।

यह वही सनसनीखेज वारदात है, जिसमें 14 जुलाई 2014 को कोलकाता से कारोबारी सुखदेव दास का अपहरण किया गया। उनके साथ कारोबारी विश्वजीत मंडल भी थे। दोनों को पहले झारखंड के जसीडीह स्थित होटल में रखा गया। इसके बाद बोकारो में छड़ खरीदवाने का झांसा देकर उन्हें बिहार के पंडारक स्थित घर लाया गया। यहां 50 लाख रुपये की फिरौती नहीं मिलने पर सुखदेव दास को कथित तौर पर AK-47 से गोलियों से छलनी कर दिया गया। विश्वजीत मंडल को भी गंगा किनारे ले जाकर मौत के घाट उतार दिया गया। दोनों शवों को बोरे में बंद कर उफनती गंगा में फेंक दिया गया ताकि वारदात का कोई सुराग न बचे।

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मगर कातिलों की यह चाल ज्यादा दिन नहीं चली। कोलकाता पुलिस की शुरुआती जांच के बाद मामला अदालत पहुंचा और पीड़ित परिवार की गुहार पर 2015 में कोलकाता हाईकोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई की पड़ताल में सामने आया कि इस साजिश में भोला सिंह, पटना के एसके नगर निवासी विकास सिंह, पंडारक के विपुल सौरव भारती उर्फ आजाद कुमार समेत कई लोग शामिल थे। हाल ही में सीबीआई ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर पूरे घटनाक्रम की परतें अदालत के सामने रख दीं।

कहानी का सबसे दिलचस्प और खौफनाक पहलू यह है कि कभी सीआरपीएफ का कॉन्स्टेबल रहा भोला सिंह अपराध की दुनिया में ऐसा उतरा कि सरकारी वर्दी छोड़ गैंगस्टर बन बैठा। निशानेबाजी में माहिर भोला का नाम धीरे-धीरे हत्या, रंगदारी और अपहरण की दुनिया में खौफ का पर्याय बन गया। वह बाहुबली नेटवर्क से भी जुड़ा रहा, फिर ठेकेदारी और गैंगवार की अदावत में अपने पुराने आकाओं से अलग होकर खुद का गिरोह खड़ा कर लिया।

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पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि गिरफ्तारी से बचने के लिए भोला और उसका साथी विकास 2013 में पश्चिम बंगाल भाग गए। वहां दोनों ने अपनी पहचान बदल ली। भोला ने खुद को 'गौतम कुमार' और विकास ने महेश राम बताकर किराये के फ्लैट लिए और महीनों तक फर्जी पहचान के सहारे फरारी काटते रहे। यहीं से उन्होंने अपहरण और हत्या की उस साजिश को अंजाम दिया, जिसने दो परिवारों की दुनिया उजाड़ दी।

अब जब सूरत से गिरफ्तारी के बाद भोला सिंह पुलिस की रिमांड पर है, तो जांच एजेंसियों की निगाह सिर्फ पुराने डबल मर्डर केस पर नहीं, बल्कि उसके पूरे क्राइम सिंडिकेट पर है। पुलिस मान रही है कि पूछताछ में कई अनसुलझे कत्ल, हथियारों की सप्लाई, रंगदारी के नेटवर्क और फरारी के दौरान उसे शरण देने वालों के नाम भी सामने आ सकते हैं। बारह साल बाद कानून का शिकंजा आखिर उस शख्स तक पहुंचा है, जिसने कभी फिरौती, गोलियों और दहशत के दम पर अपना खौफ कायम किया था। अब देखना यह है कि रिमांड की इस पूछताछ में गुनाहों की कितनी नई परतें खुलती हैं और किन-किन चेहरों का नकाब उतरता है।