Bihar Crime: रक्तरंजित साजिश का पर्दाफाश, अंधकार की आगोश में रची जा रही थी बड़े कत्लेआम की योजना, हरनौत पुलिस और डीआईयू के शिकंजे में आए 5 शातिर अपराधी
Bihar Crime: खाकी की मुस्तैदी और दिलेरी के आगे बदमाशों के नापाक मंसूबे एक बार फिर खाक में मिल गए।...

Bihar Crime: खाकी की मुस्तैदी और दिलेरी के आगे बदमाशों के नापाक मंसूबे एक बार फिर खाक में मिल गए। नालंदा जिले के हरनौत थाना क्षेत्र से एक बेहद सनसनीखेज और खौफनाक खबर सामने आ रही है। हरनौत थाना पुलिस और जिला आसूचना इकाई की संयुक्त एवं त्वरित कार्रवाई ने एक ऐसे शातिर आपराधिक गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो किसी संगीन वारदात को अंजाम देने के लिए अंधकार में साजिश रच रहा था। पुलिस ने घेराबंदी कर 05 कुख्यात और सक्रिय अपराधियों को दबोचने में बड़ी सफलता हासिल की है।
चेरन ओवरब्रिज के पास चल रहा था खौफनाक षड्यंत्र
गुप्त सूचना के आधार पर दिनांक 29 अक्टूबर 2026 की देर रात्रि हरनौत थाना अंतर्गत चेरन ओवरब्रिज के पास पुलिस ने जाल बिछाया। ये सभी शातिर किसी बड़े अपराध को अंजाम देने की नीयत से वहां एकत्र हुए थे। पुलिस बल को देखते ही बदमाशों के होश उड़ गए, लेकिन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें भागने का कोई मौका नहीं दिया और दबोच लिया। तलाशी के दौरान इनके पास से अत्याधुनिक हथियारों का जखीरा बरामद हुआ, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि वे किसी बड़ी खून-खराबे या डकैती की फिराक में थे।
जरायम की दुनिया के शातिर चेहरे और बरामदगी
गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों की पहचान मल्लू कुमार (पिता रामवृक्ष केवट), पिंटू कुमार (पिता स्व. बिंदा यादव), किशन सिंह (पिता शिवा सिंह), मिथुन कुमार (पिता बढ़न राम) और विशाल कुमार (पिता विकास पासवान) के रूप में हुई है। ये सभी अलग-अलग इलाकों के रहने वाले हैं और जरायम की दुनिया के पुराने खिलाड़ी हैं।पुलिस ने इनके कब्जे से 02 अवैध देशी कट्टा, 08 जिंदा कारतूस, 05 मोबाइल फोन (जिनमें से 02 मोबाइल पिछले दिनों रूपसपुर गांव में हुई चोरियों से जुड़े हैं) सामान बरामद किए हैं।
अपराध का काला इतिहास और लंबी फेहरिस्त
जांच में यह बात खुलकर सामने आई है कि ये तमाम अपराधी पहले भी कई बार जेल की सलाखों के पीछे जा चुके हैं। नालंदा जिले के विभिन्न थानों के अलावा अन्य जगहों पर भी इनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। हरनौत थाना, रहुई थाना, दीपनगर थाना और यहां तक कि पश्चिम बंगाल के धूलगढ़ ओपी (संकरैल थाना) में भी इनके विरुद्ध संगीन मामलों (जैसे BNS की धारा 331(4), 310(a)(s) आदि) के तहत कांड दर्ज हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह एक अंतरराज्यीय या कम से कम संगठित आपराधिक गिरोह का हिस्सा हैं जो लगातार वारदातों को अंजाम दे रहे थे।
पुलिस टीम की बहादुरी
इस सफल और जोखिम भरे ऑपरेशन को अंजाम देने वाली संयुक्त टीम में थानाध्यक्ष सह पुलिस निरीक्षक मुकेश कुमार वर्मा, डीआईयू के पुलिस निरीक्षक आलोक कुमार, पु.अ.नि. चंदन कुमार, प्रमोद कुमार तथा अन्य पुलिसकर्मी व चालक शामिल थे। पुलिस अब इस गिरोह के बाकी बचे अन्य गुर्गों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है, ताकि अपराध के इस समूचे नेटवर्क का दायरा पूरी तरह से समेटा जा सके।
















