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Kashi Vishwanath Temple: काशी विश्वनाथ मंदिर में 2.6 किलो सोने की सनसनीखेज चोरी, मचा था हड़कंप और बदल गया मंदिर का इतिहास,1983 की चोरी से सरकार ने कैसे संभाली कमान? पढ़िए

Kashi Vishwanath Temple: भगवान काशी विश्वनाथ के गर्भगृह से जुड़े सोने के अर्घा से करीब 2.6 किलो सोना गायब होने की खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया था।...

1983 Gold Theft Changed Kashi Vishwanath Forever read
राम मंदिर दान विवाद के बीच चर्चा में काशी का 1983 कांड- फोटो : social Media

Kashi Vishwanath Temple: जनवरी 1983... काशी की गलियों में सन्नाटा नहीं, बल्कि ग़ुस्से, बेचैनी और सनसनी का शोर था। भगवान काशी विश्वनाथ के गर्भगृह से जुड़े सोने के अर्घा से करीब 2.6 किलो सोना गायब होने की खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया था। यह महज चोरी का मामला नहीं माना गया, बल्कि आस्था पर सबसे बड़ा हमला समझा गया। इस वारदात के बाद वाराणसी की फिजा में खौफ, अफवाहों और एहतियात का ऐसा दौर शुरू हुआ जिसने न सिर्फ अपराध की जांच को नई दिशा दी, बल्कि मंदिर के पूरे प्रशासनिक ढांचे को भी हमेशा के लिए बदल दिया।

बताया जाता है कि 4 और 5 जनवरी 1983 की दरम्यानी रात बदमाशों ने भगवान के ज्योतिर्लिंग के चारों ओर लगे सोने की परत वाले अर्घा को निशाना बनाया। आरोप है कि करीब 2.6 किलो सोना और अन्य कीमती सामान लेकर आरोपी फरार हो गए। जैसे ही वारदात की खबर फैली, पूरे काशी में हड़कंप मच गया। शाम ढलते ही लोग घरों की छतों पर इकट्ठा होने लगे, मशाल जुलूस निकाले गए और "हर-हर महादेव" के जयकारों से पूरा शहर गूंज उठा। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह विरोध तब तक जारी रहा जब तक पुलिस ने 22 जनवरी 1983 को इस मामले में 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर चोरी गया सामान बरामद करने का दावा नहीं किया।

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जांच के दौरान यह भी सामने आया कि गिरफ्तार किए गए कुछ आरोपी कथित तौर पर लंबे समय से मंदिर व्यवस्था से जुड़े रहे थे। इसी के बाद मंदिर प्रशासन और चढ़ावे के प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठने लगे। राज्य सरकार ने पूरे प्रबंधन की जांच के आदेश दिए। जांच समिति ने प्रशासनिक अव्यवस्था, चढ़ावे के कथित दुरुपयोग और श्रद्धालुओं की सुविधाओं में कमियों की ओर इशारा किया। इन निष्कर्षों के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीपति मिश्र की सरकार ने 24 जनवरी 1983 को अध्यादेश लाकर मंदिर का प्रशासन सरकार द्वारा गठित ट्रस्ट को सौंप दिया।

बाद में उत्तर प्रदेश श्री काशी विश्वनाथ मंदिर अधिनियम, 1983 लागू हुआ, जिसने मंदिर और उसकी संपत्तियों के प्रबंधन को कानूनी आधार दिया। इस नई व्यवस्था में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट का गठन हुआ और उसके संचालन में मुख्य कार्यकारी अधिकारी  की महत्वपूर्ण भूमिका तय की गई। यहीं से मंदिर का प्रशासन पारंपरिक महंत व्यवस्था से निकलकर संस्थागत ढांचे के अधीन आ गया।

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नई व्यवस्था लागू होने के बाद महंत परिवार की भूमिका सीमित हो गई। अब परिवार केवल सप्तऋषि आरती और कुछ पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों तक ही सीमित है, जबकि मंदिर का प्रशासन ट्रस्ट के माध्यम से संचालित होता है।

समय के साथ इस प्रशासनिक बदलाव का असर भी दिखाई दिया। मंदिर की आय में लगातार वृद्धि हुई और 2021 में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर बनने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिली। इस तरह 1983 की वह सनसनीखेज चोरी केवल एक आपराधिक वारदात नहीं रही, बल्कि उसने काशी विश्वनाथ मंदिर के प्रबंधन, प्रशासन और भविष्य की पूरी तस्वीर बदलकर रख दी।

रिपोर्ट- धीरेंद्र कुमार