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राम लला के खजाने पर सेंधमारी के बाद जागा ट्रस्ट, दागदार साख चमकाने की कवायद, क्या कोई महिला अफसर संभालेगी मंदिर की कमान?

Ayodhya Ram Temple: अयोध्या में राम मंदिर के दान-पात्र पर सेंधमारी और घपलेबाज़ी की खबरों ने जब से तूल पकड़ा है, तब से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की साख़ दांव पर लगी हुई है...

Ayodhya After Theft Ram Temple Trust Eyes Woman Officer for
राम लला के खजाने पर सेंधमारी के बाद जागा ट्रस्ट- फोटो : social Media

Ayodhya Ram Temple: अयोध्या में राम मंदिर के दान-पात्र पर सेंधमारी और घपलेबाज़ी की खबरों ने जब से तूल पकड़ा है, तब से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की साख दांव पर लगी हुई है. आस्था के केंद्र में इस तरह कीविश्वासघात और पैसों की हेराफेरी के आरोपों ने न सिर्फ़ श्रद्धालुओं को झकझोर दिया, बल्कि ट्रस्ट के भीतर मचे घमासान को भी सरेबाज़ार ला खड़ा किया. इस साज़िश और विवाद के बीच अब ट्रस्ट ने अपनी छवि को बेदाग़ करने और व्यवस्था को जवाबदेह बनाने के लिए एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा रणनीतिक बदलाव करने का फ़ैसला किया है.

दान की चोरी का यह मामला महज़ एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था के साथ एक बड़ा फ़रेब माना जा रहा है. इस अंधेरगर्दी को ख़त्म करने के लिए ट्रस्ट के इतिहास में पहली बार एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति का ऐलान किया गया है. अब तक मंदिर के चढ़ावे और ख़र्चों का जो हिसाब-किताब चंद लोगों की मुट्ठी में बंद था, उस पर अब इस नए अफ़सर की सीधी नज़र होगी.

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इस फ़ैसले के पीछे की सबसे दिलचस्प और क्रान्तिकारी बात यह है कि इस आला दर्जे के ओहदे के लिए किसी महिला अफ़सर की ताजपोशी भी हो सकती है. ट्रस्ट ने साफ़ कर दिया है कि यह पद किसी ख़ास जेंडर का ग़ुलाम नहीं है; पुरुष और महिला दोनों के लिए इसके दरवाज़े बराबर खुले हैं. इसे मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता लाने की एक बेहद धारदार कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.

इस पूरे ऑपरेशन और चयन प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए तीन सदस्यों की एक उच्च स्तरीय कमेटी  का गठन किया गया है. इस कमेटी को अगले 30 दिनों के भीतर यानी एक महीने की मोहलत में इस पूरी छानबीन और चयन की प्रक्रिया को मुकम्मल  करने का ज़िम्मा सौंपा गया है.

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चुनौती बड़ी है: नए सीईओ के सामने सबसे पहला और बड़ा इम्तिहान मंदिर के ख़ज़ाने से जुड़े घोटाले के सुराग ढूंढना, अमानत में ख़यानत करने वाले गुनहगारों को बेनक़ाब करना और दान-दक्षिणा की पाई-पाई का पारदर्शी हिसाब जनता के सामने रखना होगा. देखना दिलचस्प होगा कि राम मंदिर को इस विवाद के दलदल से निकालने और क्लीन चिट दिलाने के लिए जिस नए व्यवस्था की शुरुआत हो रही है, उसकी बागडोर किसी महिला आईएएस या आईपीएस के हाथ में जाती है या फिर कोई पुरुष अफसर इस कांटों भरे ताज को अपने सर सजाएगा.