बिहार में आरक्षण पर सियासत तेज : मंत्री संतोष सुमन बोले- 'जरूरत पड़ी तो दोनों एक साथ देंगे इस्तीफा'

बिहार में आरक्षण की समीक्षा और वर्गीकरण के मुद्दे पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी बीच बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन ने एक बड़ा बयान दिया है....

बिहार में आरक्षण पर सियासत तेज : मंत्री संतोष सुमन बोले- 'जर
आरक्षण को लेकर मंत्री संतोष सुमन का बड़ा बयान- फोटो : रिषभ कुमार

Vaishali : बिहार में आरक्षण की समीक्षा और वर्गीकरण के मुद्दे पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी बीच बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन ने एक बड़ा बयान दिया है। हाजीपुर में पत्रकारों द्वारा जब पूछा गया कि आरक्षण के मुद्दे पर आपके और चिराग पासावन के बीच बात इस्तीफे तक पहुंच गई है और पहले इस्तीफा कौन देगा, तो मंत्री ने सहजता से मुस्कुराते हुए कहा कि अगर इस्तीफा देना ज्यादा कारगर साबित होता है, तो वे दोनों एक साथ इस्तीफा देने को तैयार हैं।


दलित समाज की 22 में से 18 जातियां आज भी पिछड़ी, अलग श्रेणी की मांग 

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मंत्री संतोष सुमन ने आरक्षण व्यवस्था में समीक्षा और वर्गीकरण को वर्तमान समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने तर्क दिया कि सामाजिक स्तर पर भेदभाव आज भी व्याप्त है और आरक्षण का मूल आधार सामाजिक स्थिति ही रहा है। उन्होंने कहा कि दलित समाज में कई ऐसे वर्ग हैं, जो अत्यंत पिछड़े और मुख्यधारा से वंचित हैं। ऐसे समाज को आगे लाने के लिए या तो आरक्षण की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए अथवा उनके लिए एक अलग श्रेणी बनाकर आरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि वे अपनी श्रेणी के भीतर प्रतिस्पर्धा कर आगे बढ़ सकें। उन्होंने दावा किया कि बिहार की 22 दलित जातियों में से 18 जातियां आज भी बेहद पिछड़ी हैं, जहां शिक्षा का स्तर काफी कम है और उनके समाज से एक भी आईएएस या आईपीएस नहीं बन पाया है।


चार भाइयों का उदाहरण देकर समझाया सामाजिक जिम्मेदारी का सिद्धांत 

आरक्षण के दूरगामी उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए मंत्री ने कहा कि आजादी के इतने दशकों बाद भी समाज के कई वर्ग पीछे छूट गए हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि यदि चार भाइयों में से एक भाई प्रगति कर लेता है और तीन भाई पीछे रह जाते हैं, तो आगे बढ़ने वाले भाई का नैतिक कर्तव्य है कि वह अपने अन्य भाइयों को आगे बढ़ाने में मदद करे। इसी प्रकार, समाज के पिछड़े और शोषित वर्गों को संबल देने के लिए नई व्यवस्था पर विचार किया जाना आवश्यक है।


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चिराग पासवान के साथ बेहतर संबंधों का दावा, वैचारिक अंतर को बताया स्वाभाविक 

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के साथ मतभेदों के सवाल पर संतोष सुमन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनके बीच नियमित बातचीत होती रहती है। उन्होंने कहा कि दोनों ही दल एनडीए गठबंधन में पूरी मजबूती के साथ शामिल हैं और उनके व्यक्तिगत संबंध भी काफी प्रगाढ़ हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रत्येक राजनीतिक दल की अपनी अलग सोच और विचारधारा होती है, इसलिए आरक्षण जैसे संवेदनशील विषयों पर अलग-अलग राय होना स्वाभाविक है।


क्रीमी लेयर पर स्थिति की स्पष्ट और यूजीसी मुद्दे पर टिप्पणी से परहेज 

अपने बयान में क्रीमी लेयर की अवधारणा पर स्थिति स्पष्ट करते हुए मंत्री ने कहा कि वे क्रीमी लेयर लागू करने की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि उन लोगों की वकालत कर रहे हैं जो समाज में आज भी पूरी तरह से वंचित और पिछड़े हैं। उनके लिए ठोस और पारदर्शी व्यवस्था बनाने की जरूरत है। वहीं, यूजीसी से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी अपने सिद्धांतों के अनुरूप कार्य कर रही है और वे प्रदर्शन कर रहे लोगों पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।


रिषभ की रिपोर्ट