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रोहतास के नहरों में पानी की कमी, धान की रोपनी के समय किसानों पर गहराया जल संकट

रोहतास जिले में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही धान की रोपनी के लिए किसानों ने बिछड़ा तो तैयार कर लिया है, लेकिन नहरों में पानी नहीं पहुंचने से उनके सामने घोर संकट खड़ा हो गया है...

रोहतास के नहरों में पानी की कमी, धान की रोपनी के समय किसानों
रोहतास के नहरों में पानी की कमी से किसान परेशान- फोटो : रंजन कुमार

Sasaram : बिहार के 'धान का कटोरा' कहे जाने वाले रोहतास जिले से किसानों की परेशानी की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही धान की रोपनी के लिए किसानों ने बिछड़ा (नर्सरी) तो तैयार कर लिया है, लेकिन नहरों के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंचने से उनके सामने घोर संकट खड़ा हो गया है। विशेषकर डेहरी इलाके की सकला रजवाहा नहर में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं छोड़े जाने के कारण सिंचाई ठप पड़ी है, जिससे काराकाट प्रखंड क्षेत्र के दर्जनों गांवों के किसान बेहद परेशान हैं।


नहर से दूर स्थित खेतों के मालिकों पर मंडराया भारी आर्थिक संकट

स्थानीय स्थिति यह है कि बड़ीहा से सकला तक जाने वाली सकला रजवाहा नहर के बिल्कुल किनारे स्थित किसान तो किसी तरह थोड़े-बहुत पानी का जुगाड़ कर पा रहे हैं। लेकिन जिन किसानों के खेत इस नहर से दूर हैं, उनके खेतों तक पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंच पा रही है। पानी के इस गंभीर संकट के कारण किसानों को अब महंगे साधनों (पंपसेट) पर निर्भर होना पड़ रहा है, जिससे उन पर अप्रत्याशित आर्थिक बोझ बढ़ गया है। अगर जल्द ही खेतों को पानी नहीं मिला, तो धान के बिछड़े सूखने की कगार पर पहुंच जाएंगे।


इंद्रपुरी सोन बराज से सप्लाई हो रहा पानी, मुख्य अभियंता ने दी जानकारी

विदित हो कि रोहतास के इस मैदानी इलाके में सिंचाई के लिए इंद्रपुरी स्थित सोन बराज से ही पानी की सप्लाई की जाती है। इस गंभीर समस्या के संबंध में जब सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता अजय कुमार सिंह से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि नहरों में पानी की आपूर्ति बढ़ाने के लिए फिलहाल सोन बराज में सात हजार क्यूसेक पानी उपलब्ध हुआ है। इस कुल पानी में से पश्चिम संयोजन नहर में तीन हजार क्यूसेक पानी तुरंत छोड़ दिया गया है, जबकि अन्य सहायक नहरों में भी रोटेशन के आधार पर लगातार पानी भेजा जा रहा है।


मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से पानी के लिए है समझौता, जल्द दूर होगी किल्लत

सिंचाई विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने तकनीकी पहलुओं को साझा करते हुए बताया कि सोन नदी में मुख्य रूप से दो पड़ोसी राज्यों से पानी लेने का इकरारनामा (समझौता) है। इसके तहत मध्य प्रदेश के बाणसागर जलाशय से एक मिलियन एकड़ फीट तथा उत्तर प्रदेश के रिहंद बांध से 2.5 मिलियन एकड़ फीट पानी इकरारनामा के अनुसार बिहार को सप्लाई किया जाना है। विभाग के मुताबिक, अंतरराज्यीय जल आपूर्ति में आने वाली तकनीकी दिक्कतों को समय रहते दूर कर लिया जाएगा, ताकि नहरों में पानी का प्रवाह सामान्य हो सके।


समय पर नहीं मिला पानी तो प्रभावित होगा 'धान के कटोरे' का उत्पादन

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रोहतास जिले की मुख्य पहचान 'धान के कटोरे' के रूप में है, जहां की अर्थव्यवस्था पूरी तरह कृषि और धान की बंपर पैदावार पर टिकी हुई है। ऐसे में अगर मुख्य रोपनी के समय ही पानी का यह संकट लंबा खिंच गया, तो इस साल धान के उत्पादन पर इसका बेहद बुरा असर पड़ेगा। क्षेत्र के किसानों ने जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग से मांग की है कि कागजी दावों से इतर जमीनी स्तर पर त्वरित कार्रवाई करते हुए सकला रजवाहा नहर के अंतिम टेल (छोर) तक पानी पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।

रंजन की रिपोर्ट