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Bihar health system: भगवान भरोसे बिहार के अस्पताल! डॉक्टर ने किया रेफर पर नहीं मिली एंबुलेंस, 3 घंटे बाद टूटी सांस, आखिर इन मौतों का जिम्मेदार कौन?

Bihar health system: बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर कठघरे में खड़ी है। सासाराम से सामने आई दर्दनाक घटना लचर सिस्टम की ऐसी तस्वीर दिखाती है, जहां इलाज से पहले ही जिंदगी हार जाती है।

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भगवान भरोसे बिहार के अस्पताल! - फोटो : reporter

Bihar health system: बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर कठघरे में खड़ी है। सासाराम से सामने आई  दर्दनाक घटना लचर सिस्टम की ऐसी तस्वीर दिखाती है, जहां इलाज से पहले ही जिंदगी हार जाती है। सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का फासला इस कदर बड़ा है कि एक महिला को एंबुलेंस के इंतजार में अपनी जान गंवानी पड़ी।

मिली जानकारी के मुताबिक, महिला की तबीयत बिगड़ने पर उसे स्थानीय अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद तुरंत रेफर कर दिया। लेकिन असली इम्तिहान यहीं से शुरू हुआ। रेफरल के बाद एंबुलेंस के लिए पति और बेटी करीब 3 घंटे तक गुहार लगाते रहे, मगर सिस्टम की धीमी चाल के आगे उनकी हर कोशिश बेकार साबित हुई।

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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला अस्पताल परिसर में ही तड़पती रही। परिवार के लोग बार-बार एंबुलेंस की मांग करते रहे, लेकिन न तो समय पर वाहन मिला और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। आखिरकार, इलाज से पहले ही महिला ने दम तोड़ दिया। यह सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि सिस्टम फेलियर की एक और दर्दनाक मिसाल बन गई। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विभागीय अधिकारियों को स्थिति की जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। जिम्मेदार लोग या तो चुप्पी साधे रहे या फिर अपनी मजबूरी का हवाला देते नजर आए।

घटना के बाद इलाके में गुस्सा और आक्रोश साफ देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। एंबुलेंस जैसी जरूरी सेवा का समय पर न मिलना सीधे-सीधे लापरवाही और कुप्रबंधन को दर्शाता है।

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जब इस मामले को लेकर दिनारा के विधायक आलोक सिंह से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाएंगे और जल्द समाधान की कोशिश करेंगे। हालांकि, इस बयान के बाद भी लोगों के मन में यह सवाल बना हुआ है कि आखिर कब तक वादे ही इलाज बनते रहेंगे?

यह घटना एक बार फिर इस कड़वी सच्चाई को उजागर करती है कि बिहार में स्वास्थ्य सेवाएं अभी भी कई जगहों पर भगवान भरोसे चल रही हैं। जहां एक तरफ सरकार योजनाओं और सुधारों के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझते नजर आते हैं।

फिलहाल, यह मामला सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है क्या समय पर एंबुलेंस मिल जाती, तो एक जान बच सकती थी? जवाब शायद सबके पास है, लेकिन जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं।

 सोनू सिंह की रिपोर्ट