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Bihar Mountain Mining: बिहार के इस पहाड़ पर 25 साल बाद फिर शुरु होगा खनन, हजारों लोगों को मिलेगा रोजगार

Bihar Mountain Mining: रोहतास जिले के लिए राहत भरी खबर है। करीब ढाई दशक से बंद पड़े करवंदिया पहाड़ में एक बार फिर खनन कार्य शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। खनन शुरु होने से हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा।

खनन
25 साल बाद फिर शुरु होगा खनन- फोटो : News4Nation

Bihar Mountain Mining: बिहार के रोहतास जिले से बड़ी खबर सामने आ रही है। जहां लगभग 25 वर्षों के लंबे इंतजार और कानूनी बाधाओं को पार करने के बाद सासाराम के करवंदिया पहाड़ में एक बार फिर खनन कार्य शुरू होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक फैसले से न केवल सरकार के राजस्व में भारी बढ़ोतरी होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर हजारों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। कभी पत्थर उद्योग का केंद्र रहे इस इलाके में मशीनों की गूंज फिर से सुनाई देगी, जिससे जिले के आर्थिक परिदृश्य के पूरी तरह बदलने की उम्मीद है।

25 वर्षों से वीरान पड़ा पहाड़ होगा गुलजार

जानकारी अनुसार राज्य सरकार ने इस दिशा में प्रक्रिया को गति दे दी है, जिससे इलाके में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने की उम्मीद जगी है। हाल ही में राज्य के विकास आयुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में जिले के चिह्नित पत्थर भूखंडों के बंदोबस्त की प्रक्रिया जल्द शुरू करने का निर्णय लिया गया। निर्देश दिया गया है कि जिन भूखंडों को वन, पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग से अनापत्ति मिल चुकी है और जिनका जिला सर्वेक्षण प्रतिवेदन तैयार हो चुका है या अंतिम चरण में है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया जाए। यदि प्रक्रिया तय समय पर पूरी होती है, तो 25 वर्षों से वीरान पड़ा करवंदिया पहाड़ एक बार फिर मजदूरों की आवाजाही से गुलजार हो सकता है।

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रोजगार के नए अवसर

खनन कार्य शुरू होने से रोहतास समेत आसपास के क्षेत्रों और पड़ोसी राज्यों झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के हजारों लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। अमरा-तालाब और करवंदिया-बांसा जैसे इलाकों में लगने वाले साप्ताहिक बाजारों में भी फिर से चहल-पहल लौटने की उम्मीद है। करवंदिया पहाड़ी उच्च गुणवत्ता वाले काले पत्थर के लिए जानी जाती रही है। यहां से निकलने वाली गिट्टी और पत्थर की मांग कई राज्यों में रही है। पहले यहां सिलवट, जांता जैसे उत्पाद बनाकर भी बाहर भेजे जाते थे।

2012 में बंद हुआ खनन

जून 2012 में यहां खनन कार्य पूरी तरह बंद कर दिया गया था। इसके बाद 2015 में खदानों के बंदोबस्त की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन वन विभाग की आपत्ति के कारण निविदा जारी होने से ठीक पहले इसे स्थगित करना पड़ा। खनन बंद होने का सबसे ज्यादा असर जिले के क्रशर उद्योग पर पड़ा। पहले खनन पट्टों के आधार पर करीब 400 क्रशर मशीनों को लाइसेंस मिला था, लेकिन पट्टों की अवधि समाप्त होने के साथ ही उनकी अनुज्ञप्ति भी रद्द होती गई। 

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अधिकारियों की प्रतिक्रिया

अगस्त 2011 में 31 मशीनों के लाइसेंस रद्द होने की शुरुआत हुई, जबकि अप्रैल 2013 तक शेष 121 मशीनों की अनुज्ञप्ति भी समाप्त कर दी गई। इससे संचालकों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। जिला खनन पदाधिकारी रणधीर कुमार ने बताया कि विभागीय निर्देश के तहत पत्थर खदानों का जिला सर्वेक्षण अंतिम चरण में है। राज्य सरकार से मंजूरी मिलते ही चिह्नित खदानों के बंदोबस्त की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।