Bihar News : ‘हम’ प्रवक्ता श्याम सुंदर शरण का सांसद सुधाकर सिंह पर पलटवार, पूछा- वंचितों के हक की बात पर क्यों याद आता है पागलखाना?
Bihar News : हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता श्याम सुंदर शरण ने राजद सांसद सुधाकर सिंह के उस बयान पर जोरदार हमला बोला है.......पढ़िए आगे

PATNA : हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता श्याम सुंदर शरण ने कहा की धारा 420 और 406 के आरोपी चावल घोटाले में जेल की यात्रा करने वाले सांसद सुधाकर सिंह आज आरक्षण की समीक्षा और सबसे वंचित समुदायों को उनका उचित हिस्सा देने की बात करने वालों को राँची पागलखाना जाने की सलाह दे रहे हैं। कहा की आप कहते हैं कि आरक्षण तो संविधान सभा ने दिया है और उसमें किसी तरह की समीक्षा या बदलाव के लिए संविधान बदलना पड़ेगा। तो फिर एक सीधा सवाल है—मंडल आयोग की सिफारिशों के आधार पर विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार द्वारा लागू किया गया OBC आरक्षण क्या संविधान सभा ने दिया था? क्या इसके लिए संविधान बदलना पड़ा? जननायक कर्पूरी ठाकुर ने बिहार में पिछड़ों के भीतर पिछड़ा और अतिपिछड़ा वर्गीकरण कर अलग व्यवस्था बनाई। क्या इसके लिए संविधान बदलना पड़ा था? और मोदी सरकार द्वारा लागू 10 प्रतिशत EWS आरक्षण की बात करें तो वह संविधान में संशोधन के बाद आया। यानी संविधान और कानून की अपनी प्रक्रियाएं हैं।
शरण ने कहा की सवाल यह है कि जब मंडल आयोग के आधार पर नई आरक्षण व्यवस्था लागू हो सकती है, जब कर्पूरी ठाकुर पिछड़ा-अतिपिछड़ा वर्गीकरण का मॉडल दे सकते हैं, तो आज सबसे वंचित दलित समुदायों को आरक्षण के भीतर उनका न्यायपूर्ण हिस्सा देने की बात आते ही अचानक “संविधान बदलना पड़ेगा” का डर क्यों दिखाया जा रहा है? और अब तो सर्वोच्च न्यायालय की सात सदस्यीय संविधान पीठ ने भी 2024 में 6:1 के बहुमत से स्पष्ट कर दिया कि राज्य अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के भीतर उप-वर्गीकरण कर सकते हैं, ताकि सबसे अधिक वंचित समुदायों तक आरक्षण का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंच सके।
उन्होंने कहा की सामाजिक न्याय कोई जड़ व्यवस्था नहीं है कि ताकतवर समुदाय पीढ़ियों तक उसका अधिक लाभ लेते रहें और सबसे पीछे खड़ा समुदाय केवल नारे सुनता रहे। सामाजिक न्याय का असली अर्थ है—सबसे वंचित की पहचान करना और उसे उसका वास्तविक हक दिलाना। और जहां तक पागलखाने और इलाज की बात है, सांसद महोदय को दूसरों को राँची भेजने की सलाह देने से पहले अपने आका के राजनीतिक परिवार के भीतर भी झांक लेना चाहिए। राजद में तेजप्रताप यादव ने जिस तरह समय-समय पर अपने राजनीतिक “इलाज केंद्र” चलाए हैं और लोगों का “इलाज” करने के दावे किए हैं, उसे पूरा बिहार जानता है। जगदा बाबू और रघुवंश बाबू को जिस तरह बेइज्जत किया गया तब ज्ञान और ऐंठन कहाँ गया था। इसलिए दूसरों को पागलखाने का रास्ता दिखाने से पहले अपने राजनीतिक घर की गतिविधियों पर भी थोड़ा आत्मचिंतन कर लेना चाहिए।
शरण ने कहा की जब दलित, महादलित, पिछड़ा और अतिपिछड़ा अपने हिस्से की बात करते हैं तो उन्हें पागल कहना आसान है, लेकिन उनके सवालों का जवाब देना मुश्किल। सवाल पूछने वाले पागल नहीं होते। अक्सर वही लोग व्यवस्था में सबसे पीछे छूट गए लोगों की आवाज बनते हैं। सुधाकर सिंह जी, वंचितों के सवालों का जवाब दीजिए—उन्हें पागलखाने भेजने की सलाह मत दीजिए।















