Bihar tender Scam: ED के सामने पेश नहीं हुए IAS आनंद किशोर, एक के बाद एक कई बड़े IAS अधिकारियों से हुई लंबी पूछताछ,प्रवर्तन निदेशालय के समन के बाद मची हलचल
Bihar tender Scam: बिहार के प्रशासनिक गलियारों में बहुचर्चित रिशु श्री टेंडर घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है।...

Bihar tender Scam: बिहार के प्रशासनिक गलियारों में बहुचर्चित रिशु श्री टेंडर घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। मामले से जुड़े प्रमुख नाम और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आनंद किशोर शुक्रवार को निर्धारित समय पर प्रवर्तन निदेशालय के पटना स्थित क्षेत्रीय कार्यालय के समक्ष पेश नहीं हुए। उन्होंने जांच एजेंसी से पूछताछ के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा है, जिसे ED ने स्वीकार कर लिया है। अब आने वाले सप्ताह में उनसे और एक अन्य अधिकारी योगेश कुमार सागर से कड़ी पूछताछ की जाएगी।
व्हाट्सएप चैट और रिश्तों की कड़ियां खंगाल रही है जांच एजेंसी
सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय की टीम के पास आईएएस अधिकारियों और ठेकेदार रिशु श्री के बीच के संबंधों को लेकर सवालों का भारी जखीरा तैयार था। विशेषकर रिशु श्री के साथ इन अधिकारियों की व्हाट्सएप चैट और कथित लेन-देन के पुख्ता सबूतों के आधार पर पूछताछ की जानी है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि टेंडर आवंटन में भ्रष्टाचार की इन कड़ियों के तार भीतर तक कहां-कहां जुड़े हुए हैं।
एक के बाद एक कई बड़े IAS अधिकारियों से हुई लंबी पूछताछ
इस सनसनीखेज मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने कुल छह वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों—आनंद किशोर, संतोष कुमार मल्ल, धर्मेंद्र कुमार, योगेश कुमार सागर, अभिलाषा कुमारी शर्मा और सुनील यादव—को समन जारी किया था। इनमें से चार अधिकारियों से मैराथन पूछताछ हो चुकी है:
IAS संतोष कुमार मल्ल: गुरुवार को इनसे लगभग 8 घंटे तक पूछताछ हुई। इस दौरान ठेकेदार रिशु श्री से उनके संबंधों, आम की डिलीवरी, दिल्ली के एक रहस्यमयी युवक से मुलाकात और चर्चित '7 प्रतिशत कमीशन' के एंगल पर तीखे सवाल पूछे गए।
IAS धर्मेंद्र कुमार: बुधवार को इनसे करीब 6 घंटे तक पूछताछ की गई, जिसमें मुख्य रूप से विदेश यात्राओं और रिशु श्री के साथ नजदीकियों पर फोकस रहा।
IAS सुनील यादव: मंगलवार को इनसे करीब साढ़े 7 घंटे तक पूछताछ की गई।
IAS अभिलाषा कुमारी शर्मा: सोमवार को ही प्रवर्तन निदेशालय के सामने पेश होकर अपना पक्ष रख चुकी हैं।
हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बाद तेज हुई सुगबुगाहट
यह पूरी जांच तब और अधिक आक्रामक हो गई जब विजिलेंस कोर्ट से रिशु श्री की जमानत याचिका खारिज होने के बाद उसने पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। विगत 15 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान माननीय हाईकोर्ट ने इस बात पर कड़ी नाराजगी जताई थी कि इस पूरे नेटवर्क में ठेकेदार रिशु श्री तो महज एक 'छोटा मोहरा' है, जबकि असली मास्टरमाइंड बड़े अधिकारी हैं। कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी के बाद ही ED ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को शिकंजे में लेना शुरू किया।
कौन है ठेकेदार रिशु श्री और क्या है पूरा मामला?
बिहार के सारण जिले का रहने वाला रिशु श्री वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस और अन्य रसूखदारों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार तथा मनी लॉन्ड्रिंग मामले का मुख्य आरोपी है, जिसके खिलाफ विशेष निगरानी इकाई ने भी मामले दर्ज किए हैं।जांच एजेंसियों के मुताबिक, रिशु श्री सरकारी महकमे के अधिकारियों को अवैध तरीके से लाभ पहुंचाता था। इसके बदले में उसे गोपनीय सरकारी टेंडरों की जानकारी लीक हो जाती थी और वह अधिकारियों की मिलीभगत से टेंडर की शर्तों में मनचाहा बदलाव करवाकर अपने पसंदीदा ठेकेदारों को काम दिलवाता था। इस पूरे खेल में भारी-भरकम कमीशनखोरी और कालेधन के साम्राज्य का पर्दाफाश होने की पूरी संभावना है, जिस पर अब केंद्रीय एजेंसी की पैनी नजर टिकी हुई है।
















