LATEST NEWS

  • DM Kumar Gaurav Balances Navratri Duty and Devotion
  • Bihar News:मुजफ्फरपुर में सुरक्षा की कमान भी, मां की भक्ति भी, DM कुमार गौरव ने परिवार संग मां

  • Patna Ravan Dahan
  • Patna Ravan Dahan:पटना में रावण दहन से पहले हाई अलर्ट, गांधी मैदान में हो रही सघन जांच

  • Bihar News: कन्या पूजन के दिन झाड़ियों में फेंकी गई नवजात कन्या,थानेदार ने दिखाई इंसानियत, गोद में उठाकर पहुंचाया अस्पताल
  • Bihar News: कन्या पूजन के दिन झाड़ियों में फेंकी गई नवजात कन्या,थानेदार ने दिखाई इंसानियत, गोद में उठाकर

  • Bihar News: बक्सर में मां दुर्गा के दिव्य रूपों की जीवंत झांकी, ज्ञान गंगा के संदेश ने मोहा श्रद्धालुओं का मन
  • Bihar News: बक्सर में मां दुर्गा के दिव्य रूपों की जीवंत झांकी, ज्ञान गंगा के संदेश ने मोहा

  • Bihar Education Minister Mithilesh Tiwari
  • Bihar News: महानवमी पर मां विंध्यवासिनी के दरबार पहुंचे शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, बिहार की खुशहाली के लिए

Bihar Education News: अब कंप्यूटर बनाएगा प्रश्नपत्र, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जांचेगा कॉपियां, इस काम में भी होगा इस्तेमाल, बिहार की उच्च शिक्षा में AI की एंट्री

Bihar Education News: बिहार के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई, परीक्षा और मूल्यांकन की पारंपरिक व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है।

Bihar Universities Turn to AI for Exams Paper
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जांचेगा कॉपियां- फोटो : X

Bihar Education News: बिहार के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई, परीक्षा और मूल्यांकन की पारंपरिक व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। अब प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन तक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  की मदद लेने की योजना बनाई जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग ने इस दिशा में पहल करते हुए विज्ञान, प्रावैधिकी तथा तकनीकी शिक्षा विभाग से सहयोग मांगा है। योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए एआई नीति सलाहकार समिति और एआई नीति कार्यान्वयन समिति गठित करने की तैयारी है। यदि यह पहल लागू होती है, तो विश्वविद्यालयों में परीक्षा संचालन, पढ़ाई और शोध के तौर-तरीकों में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकता है।

प्रश्नपत्र निर्माण से कॉपियों की जांच तक AI की भूमिका

नई व्यवस्था के तहत एआई की मदद से प्रश्नपत्र तैयार करने, पाठ्यक्रम विकसित करने और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की संभावनाओं पर काम किया जाएगा। इसका उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और गुणवत्ता आधारित बनाना है। शिक्षक एआई टूल्स की सहायता से पाठ्यक्रम सामग्री, नोट्स और प्रश्नपत्र तैयार कर सकेंगे। वहीं, उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में तकनीक का इस्तेमाल मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज करने और संभावित विसंगतियों की पहचान करने में मददगार हो सकता है।हालांकि, एआई से कॉपियों की जांच किस स्तर तक कराई जाएगी और अंतिम अंक निर्धारण में शिक्षकों की भूमिका क्या होगी, इसे लेकर विस्तृत नियम और दिशा-निर्देश तय करना जरूरी होगा।

वर्चुअल लैब, चैटबॉट और शोध में भी होगा इस्तेमाल

उच्च शिक्षा में एआई का दायरा केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। विश्वविद्यालयों में वर्चुअल लैब, चैटबॉट, डिजिटल अध्ययन सामग्री और शोध कार्यों में भी इसका उपयोग करने की योजना है। छात्र जटिल विषयों को सरल तरीके से समझने, असाइनमेंट तैयार करने और प्रोजेक्ट पर काम करने में एआई की मदद ले सकेंगे। शिक्षक भी पाठ्य सामग्री विकसित करने और विद्यार्थियों की शैक्षणिक जरूरतों के अनुसार अध्ययन सामग्री तैयार करने में इस तकनीक का उपयोग कर सकेंगे।वर्चुअल लैब के जरिए प्रयोग आधारित शिक्षा को डिजिटल माध्यम से अधिक सुलभ बनाने की संभावना है। वहीं, चैटबॉट विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम, विषयों और अध्ययन सामग्री से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

नकल और पेपर लीक पर लगाम लगाने की चुनौती

परीक्षा में नकल, प्रश्नपत्र लीक और दूसरी अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए भी एआई की मदद लेने की योजना है। तकनीक का इस्तेमाल संदिग्ध गतिविधियों की पहचान, परीक्षा संबंधी डेटा के विश्लेषण और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में किया जा सकता है। हालांकि, केवल एआई लागू करने से पेपर लीक या परीक्षा में धांधली पूरी तरह समाप्त होने की गारंटी नहीं है। इसके लिए सुरक्षित डिजिटल प्रणाली, मजबूत निगरानी, जवाबदेही और समय पर कार्रवाई भी जरूरी होगी।

NSIT
Nsmch

AI के दुरुपयोग को रोकने के लिए बनेंगे नियम

उच्च शिक्षा विभाग का जोर इस बात पर भी है कि शिक्षक और छात्र एआई पर जरूरत से ज्यादा निर्भर न हों। इसके दुरुपयोग, डेटा गोपनीयता और शैक्षणिक ईमानदारी से जुड़े मामलों को ध्यान में रखते हुए नियम बनाने की तैयारी है। विशेष रूप से यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्र एआई से तैयार सामग्री को बिना समझे अपने काम के रूप में प्रस्तुत न करें और मूल्यांकन में तकनीकी त्रुटियों के कारण किसी विद्यार्थी के साथ अन्याय न हो।उच्च शिक्षा विभाग और विज्ञान, प्रावैधिकी तथा तकनीकी शिक्षा विभाग के बीच प्रस्तावित समन्वय से बिहार के विश्वविद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को नई दिशा देने की उम्मीद है। अब निगाहें प्रस्तावित समितियों, नीति निर्माण और इसे जमीन पर लागू करने की समयसीमा पर रहेंगी।