LATEST NEWS

  • नदियों के बढ़ते जलस्तर पर पटना प्रशासन सतर्क, डीएम ने दिए 24 घंटे तटबंध निगरानी के निर्देश
  • नदियों के बढ़ते जलस्तर पर पटना प्रशासन सतर्क, डीएम ने दिए 24 घंटे तटबंध निगरानी के निर्देश

  • Bihar News : गंडक बैराज से 1.83 लाख क्यूसेक पानी किया गया डिस्चार्ज, कई इलाकों में बाढ़ का मंडराया खतरा, सहमे लोग
  • Bihar News : गंडक बैराज से 1.83 लाख क्यूसेक पानी किया गया डिस्चार्ज, कई इलाकों में बाढ़ का

  • लोक अदालत की तैयारियों को लेकर पटना यातायात पुलिस की बैठक, लंबित ई-चालान और जनशिकायतों के निस्तारण पर जोर
  • लोक अदालत की तैयारियों को लेकर पटना यातायात पुलिस की बैठक, लंबित ई-चालान और जनशिकायतों के निस्तारण पर

  • Bihar News : गया में अवैध मिनी गन फैक्ट्री का पुलिस ने किया भंडाफोड़, मौके से अपराधी को किया गिरफ्तार, भारी मात्रा में औजार किया बरामद
  • Bihar News : गया में अवैध मिनी गन फैक्ट्री का पुलिस ने किया भंडाफोड़, मौके से अपराधी को

  • बिहार में बाढ़ और घोटालों के आरोपों पर भड़के तेजस्वी यादव, पीएम मोदी और राज्य सरकार पर साधा निशाना
  • बिहार में बाढ़ और घोटालों के आरोपों पर भड़के तेजस्वी यादव, पीएम मोदी और राज्य सरकार पर साधा

ट्रांसफर या सजा? कैडर बदलते ही 1.10 लाख शिक्षक हो जाएंगे जूनियर, इस नियम के कारण 15 साल की नौकरी पर फिर जाएगा पानी!

Bihar Teachers Transfer: बिहार के करीब 1.10 लाख शिक्षकों के लिए एक जिले से दूसरे जिले में ट्रांसफर सिर्फ घर के करीब पहुंचने का रास्ता नहीं, बल्कि सीनियारिटी और प्रमोशन पर बड़ा समझौता साबित हो सकता है।

ट्रांसफर या सजा? कैडर बदलते ही 1.10 लाख शिक्षक हो जाएंगे जून
शिक्षकों को ट्रांसफर की चुकानी पड़ेगी कीमत भारी- फोटो : social Media

Bihar Teachers Transfer: बिहार के करीब 1.10 लाख शिक्षकों के लिए एक जिले से दूसरे जिले में ट्रांसफर सिर्फ घर के करीब पहुंचने का रास्ता नहीं, बल्कि सीनियारिटी और प्रमोशन पर बड़ा समझौता साबित हो सकता है। शिक्षा विभाग के नए नियम के मुताबिक जिला कैडर बदलते ही शिक्षक की पुरानी वरिष्ठता खत्म मानी जाएगी और नए जिले में उसकी सेवा को नई नियुक्ति के तौर पर देखा जाएगा। यानी 10 से 15 साल का अनुभव रखने वाला शिक्षक भी नए जिले में पहले से तैनात कम अनुभवी शिक्षक से जूनियर हो सकता है।

इस फैसले का सबसे बड़ा असर शिक्षकों की सर्विस बुक, वरिष्ठता सूची और प्रमोशन पर पड़ने वाला है। दूसरे जिले में ट्रांसफर होने के बाद शिक्षक की नई जिले में पहली नियुक्ति मानी जाएगी। सर्विस बुक में भी नई ज्वाइनिंग का रिकॉर्ड दर्ज किया जाएगा। पुराने जिले में अर्जित वरिष्ठता का लाभ नए कैडर में नहीं मिलने की स्थिति बन सकती है।

Diarch GO

इसका सीधा असर करियर की रफ्तार पर पड़ेगा। वर्षों की सेवा के बाद भी नए जिले में शिक्षक को जूनियर मान लिया गया तो प्रधानाध्यापक और उच्च वेतनमान वाले पदों पर प्रमोशन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। अनुमान है कि कुछ शिक्षकों के प्रमोशन का रास्ता 10 से 15 साल तक पीछे खिसक सकता है।

सबसे बड़ा सियासी और प्रशासनिक सवाल स्कूलों में मिलने वाले प्रभार को लेकर है। वरिष्ठता के आधार पर प्रभारी प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी पाने वाले शिक्षक जिला बदलने के बाद इस दायरे से बाहर हो सकते हैं। यानी जिस स्कूल में वर्षों का अनुभव उनकी ताकत था, नए जिले में वही अनुभव वरिष्ठता की सूची में उन्हें ऊपर रखने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।

NSIT
Nsmch

नियम के पीछे शिक्षा विभाग का तर्क भी सामने आया है। विभाग का कहना है कि यदि दूसरे जिले से आने वाले अनुभवी शिक्षकों को तत्काल वरिष्ठता दे दी गई तो उस जिले में वर्षों से काम कर रहे स्थानीय शिक्षकों का हक प्रभावित होगा। स्थानीय शिक्षकों की प्रमोशन की बारी पीछे जा सकती है। इसी वजह से जिला कैडर में वरिष्ठता को स्थानीय सेवा से जोड़ने की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है।

लेकिन शिक्षकों के लिए असली परेशानी यहीं खत्म नहीं होती। कैडर बदलते ही एक ऐसा समीकरण बन सकता है जिसमें 15 साल पुराना शिक्षक अपने से कम अनुभव वाले शिक्षक के अधीन काम करने को मजबूर हो। यानी सेवा का अनुभव ज्यादा, लेकिन नए कैडर में पदानुक्रम में स्थान नीचे।

इसके साथ ही ट्रांसफर लेने वाले शिक्षकों के सामने एक और बड़ा लॉक-इन पीरियड होगा। एक बार जिला बदलने के बाद अगले पांच साल तक दोबारा ट्रांसफर का मौका नहीं मिलने की व्यवस्था बताई जा रही है। यानी 2026 में ट्रांसफर लेने वाला शिक्षक करीब 2031 तक नए कैडर में ही बंधा रह सकता है।

ऐसे में बिहार के शिक्षकों के लिए ट्रांसफर का फैसला सिर्फ घर-परिवार से जुड़ा विकल्प नहीं रहेगा। उन्हें दूरी कम होने के फायदे के साथ-साथ सीनियारिटी, प्रमोशन, प्रशासनिक जिम्मेदारी और पांच साल की लॉक-इन अवधि का हिसाब भी लगाना होगा। घर के करीब पहुंचने की कीमत अगर वर्षों की नौकरी की वरिष्ठता खोना है, तो यह फैसला हजारों शिक्षकों के लिए आसान नहीं होगा।