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Bihar News: सुहाग की सलामती का था व्रत, बेरहम मौत ने उजाड़ दिया सिंदूर, छठ घाट से लौटते ही मातम में बदली खुशियां

वह सड़क, जो थोड़ी देर पहले भक्तों के जयकारों से गूंज रही थी, अचानक चीख-पुकार और सिसकियों के मरघट में तब्दील हो गई।जिस सुहाग की अमरता के लिए महिला ने सूर्य देव को नमन किया , वही सुहाग उसकी आँखों के सामने ही काल के गाल में समा गया।

Nawada Chhath Tragedy Husband Killed Wife Vow Shattered
बेरहम मौत ने उजाड़ दिया सिंदूर- फोटो : reporter

Bihar News: छठ महापर्व... आस्था का वो सैलाब जहाँ डूबते सूरज को भी उम्मीदों का अर्घ्य दिया जाता है। नवादा के कलौंडा गाँव की एक महिला ने भी निर्जला उपवास रखा था। आँखों में भविष्य के सपने और होंठों पर छठी मैया के गीत थे। उसने अपने बच्चों की लंबी उम्र और पति के साये की सलामती की मन्नत माँगी थी। उसे क्या पता था कि जिस सुहाग की अमरता के लिए उसने सूर्य देव को नमन किया है, वही सुहाग उसकी आँखों के सामने ही काल के गाल में समा जाएगा।

घटना रोह थाना क्षेत्र के छनौन मोड़ की है। खुशियों का काफिला घर की दहलीज से महज 500 मीटर दूर था। जयराम चौहान अपनी पत्नी और तीन मासूम बच्चों के साथ घाट से लौट रहे थे। चेहरे पर पूजा संपन्न होने का सुकून था। तभी पीछे से आई एक बेकाबू, अज्ञात वाहन ने जयराम को ऐसी जोरदार टक्कर मारी कि ज़िंदगी और मौत का फासला सिमट गया। वह सड़क, जो थोड़ी देर पहले भक्तों के जयकारों से गूंज रही थी, अचानक चीख-पुकार और सिसकियों के मरघट में तब्दील हो गई। जिस पत्नी ने कल ही अपने पति की लंबी उम्र के लिए छठी मैया के सामने झोली फैलाई थी, आज वही सड़क पर बिखरे अपने खून से लथपथ 'सरताज' को देख सुध-बुध खो बैठी।

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स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से घायल जयराम को तुरंत रोह अस्पताल ले जाया गया। वहां से नवादा रेफर किया गया, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। एक पल में एक हंसता-खेलता परिवार बिखर गया। जयराम अपने पीछे दो मासूम बेटों, एक नन्हीं बेटी और उस अभागी पत्नी को छोड़ गए हैं, जिसके हाथों की मेहंदी का रंग अभी उतरा भी नहीं था और माँग का सिंदूर छीन लिया गया।

पुलिस अधिकारी उमाशंकर सिंह ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया और परिजनों को सौंप दिया, लेकिन उस अज्ञात वाहन का कहर आज एक पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ गया। आज कलौंडा गाँव में सन्नाटा है। वो घर, जहाँ प्रसाद की खुशबू होनी चाहिए थी, वहाँ अब सिर्फ मातमी सिसकियां हैं। यह सड़क हादसा नहीं, बल्कि एक हस्ती-खेलती ज़िंदगी का कत्ल है।

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रिपोर्ट-अमन कुमार