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Rajgir Shahi Snan: राजगीर में मलमास के दूसरे शाही स्नान पर उमड़ा श्रद्धा का असीम सागर, ब्रह्मकुंड में संतों का हो रहा दिव्य अभिषेक, अनुराधा नक्षत्र के पुण्य प्रताप से देव लोक की दिख रही छटा

Rajgir Shahi Snan: पुरुषोत्तमी मास मेले के द्वितीय शाही स्नान के इस परम पावन अवसर पर देश-विदेश से पधारे पूज्य साधु-संतों, तपस्वियों, ऋषि-मुनियों और अनगिनत श्रद्धालुओं का ऐसा अभूतपूर्व जन-सैलाब उमड़ा है, मानो साक्षात् देवलोक की आभा इस धरा पर....

Rajgir Hosts Grand Shahi Snan Amid Massive Devotee Rush
राजगीर में मलमास के दूसरे शाही स्नान पर उमड़ा श्रद्धा का असीम सागर- फोटो : social Media

Rajgir Shahi Snan:  आज इस पावन रविवार को राजगीर की पवित्र और ऐतिहासिक भूमि अध्यात्म, सनातन परंपराओं और अगाध श्रद्धा के एक ऐसे विराट उत्सव की साक्षी बन रही है, जिसकी उपमा मिलना अत्यंत दुर्लभ है। पुरुषोत्तमी मास मेले के द्वितीय शाही स्नान के इस परम पावन अवसर पर देश-विदेश से पधारे पूज्य साधु-संतों, तपस्वियों, ऋषि-मुनियों और अनगिनत श्रद्धालुओं का ऐसा अभूतपूर्व जन-सैलाब उमड़ा है, मानो साक्षात् देवलोक की आभा इस धरा पर अवतरित हो गई हो।

प्रातः काल ठीक 06:00 बजे गगनभेदी शंखनाद, डमरूओं की गूंज और मांगलिक वैदिक मंत्रोच्चार के बीच इस महास्नान का विधि-विधान से शुभारंभ हुआ। इस महान धार्मिक समागम में ११ अखाड़ों की छावनियों से निकले लगभग ५०० सिद्ध संतों के भव्य और तेजस्वी जुलूस को निहारने के लिए मानव-समुद्र हिलोरे ले रहा था।

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ब्रह्मकुंड में संतों का दिव्य दरबार, दो किलोमीटर लंबी कतारों में प्रतीक्षारत श्रद्धालु

प्रशासनिक दिशानिर्देशों और शास्त्रों की मर्यादा के अनुसार, आज इस परम पूजनीय और तपोमय ब्रह्मकुंड को केवल विशिष्ट संतों और संन्यासियों के पवित्र स्नान के लिए आरक्षित रखा गया है। आम श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुलभ दर्शन और सुदृढ़ कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्हें टेढ़े-मेढ़े बैरिकेडिंग वाले मार्गों से गर्भगृह की ओर भेजा जा रहा है।

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ब्रह्ममुहूर्त के घने अंधकार में, रात्रि 02:00 बजे से ही श्रद्धालुओं की लगभग दो किलोमीटर लंबी कतारें लग चुकी हैं। प्रत्येक सनातनी इस अलौकिक दृश्य का साक्षी बनने, अपने पापों का शमन करने और मोक्ष की कामना के साथ पूर्ण धैर्यपूर्वक अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहा है।

सजग प्रशासन और चाक-चौबंद व्यवस्था

इस अपार जन-मेदिनी को नियंत्रित करने तथा किसी भी प्रकार की अव्यवस्था अथवा अप्रिय स्थिति से बचने के लिए चप्पे-चप्पे पर दंडाधिकारियों और पुलिस बल के अनुशासित जवानों को तैनात किया गया है। प्रत्येक अखाड़े और संतों के जत्थे के साथ विशेष दंडाधिकारी नियुक्त हैं। किसी भी आकस्मिक चिकित्सा स्थिति से निपटने के लिए एम्बुलेंस, योग्य चिकित्सकों का दल और अग्निशमन विभाग को हाई अलर्ट मोड पर रखा गया है। सुरक्षा की संवेदनशीलता को देखते हुए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निरंतर वीडियोग्राफी कराई जा रही है।

संतों की भव्य शोभायात्रा और अनुराधा नक्षत्र का महासंयोग

इस पावन बेला का सबसे चित्ताकर्षक और मंत्रमुग्ध कर देने वाला दृश्य संतों की वह वैभवशाली शाही सवारी है, जो विभिन्न मठों, आश्रमों और अखाड़ों से पारंपरिक वाद्यों, शंख-घड़ियालों की ध्वनि के साथ प्रस्थान कर रही है। अपने हाथों में सनातन धर्म के ध्वज और धार्मिक प्रतीक, संपूर्ण देह पर भस्म और गेरुआ वस्त्र धारण किए, तथा मुख से 'हर-हर महादेव' एवं 'जय श्री कृष्ण' का अनवरत उद्घोष करते इन सिद्ध संतों का अलौकिक तेज भक्तों के अंतःकरण को असीम शांति प्रदान कर रहा है।

धार्मिक दृष्टिकोण से आज का यह दिन अत्यंत कल्याणकारी और फलदायी है, क्योंकि पुरुषोत्तम पूर्णिमा के पावन अवसर पर आज अनुराधा नक्षत्र का अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग निर्मित हुआ है। दोपहर 01:10 बजे तक रहने वाली इस पूर्णिमा तिथि के विषय में शास्त्रों की मान्यता है कि आज के दिन किया गया जप, तप, देव-पूजन और दान-पुण्य मनुष्य के ऐश्वर्य, यश और वैभव में अकल्पनीय वृद्धि करता है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, आज के विशेष दिन श्वेत वस्त्र, शर्करा, श्वेत अक्षत , दधि  और रजत (चांदी) का दान करने से जातक की कुंडली में चंद्र ग्रह सुदृढ़ होता है, जिससे मानसिक शांति प्राप्त होती है और जीवन के समस्त कष्ट, रोग तथा दरिद्रता का समूल नाश होता है। इस समय राजगीर का कण-कण ईश्वरीय चेतना और अलौकिक ऊर्जा से सराबोर दिखाई दे रहा है।

रिपोर्ट- राज पाण्डेय