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Nalanda Illegal Gas Refilling: नालंदा में अवैध गैस रिफिलिंग का बड़ा खेल! मजदूरों और छात्रों से मनमानी वसूली, सुरक्षा पर भी मंडरा रहा खतरा

Nalanda Illegal Gas Refilling: बिहारशरीफ में अवैध गैस रिफिलिंग का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। छोटे सिलेंडरों में महंगी गैस भरने से हजारों छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है, जबकि सुरक्षा को लेकर भी गंभीर खतरा बना हुआ है।

Nalanda Illegal Gas Refilling
नालंदा में अवैध गैस रिफिलिंग का खेल!- फोटो : freepik

Nalanda Illegal Gas Refilling: नालंदा जिला मुख्यालय बिहारशरीफ में अवैध गैस रिफिलिंग का कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है। शहर की मुख्य सड़कों से लेकर गली-मोहल्लों तक छोटे सिलेंडरों में खुलेआम गैस भरी जा रही है। इसका सबसे ज्यादा असर उन छात्रों पर पड़ रहा है जो किराये के कमरों में रहकर पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। मजबूरी में उन्हें गैस के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।

जानकारी के अनुसार कुछ समय पहले तक छोटे सिलेंडरों में गैस रिफिलिंग 80 से 85 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की जाती थी। अब गैस की कथित कमी और बाजार की स्थिति का हवाला देकर 200 से 225 रुपये प्रति किलोग्राम तक वसूले जा रहे हैं। इससे छात्रों और कम आय वाले लोगों का खर्च काफी बढ़ गया है।

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घरेलू एलपीजी कनेक्शन नहीं 

बिहारशरीफ में रहने वाले अधिकांश छात्र और किरायेदारों के पास अपना घरेलू एलपीजी कनेक्शन नहीं है। ऐसे में वे 3 से 5 किलो क्षमता वाले छोटे सिलेंडरों पर निर्भर रहते हैं। नियमित और वैध गैस आपूर्ति की व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें अवैध रिफिलिंग केंद्रों से गैस खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है।m रामचंद्रपुर, गांधी नगर और अन्य छात्र बहुल इलाकों में कई जनरल स्टोर और छोटी दुकानों के जरिए अवैध गैस रिफिलिंग का काम किया जा रहा है। बड़े घरेलू सिलेंडरों से छोटे सिलेंडरों में गैस भरकर अधिक मुनाफा कमाया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कारोबार लंबे समय से चल रहा है और लगातार बढ़ता जा रहा है।

बिहारशरीफ में 20 से 22 हजार छात्र-छात्राएं करते है पढ़ाई

सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार बिहारशरीफ में विभिन्न जिलों से आए करीब 20 से 22 हजार छात्र-छात्राएं रहकर पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। इनमें से लगभग 80 से 85 प्रतिशत छात्रों के पास अपना गैस कनेक्शन नहीं है। इसी वजह से वे इस अवैध कारोबार से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। छात्रों का कहना है कि खाना बनाने के लिए उन्हें हर महीने औसतन 4 से 5 किलो गैस की जरूरत होती है। पहले इस पर कम खर्च आता था, लेकिन अब बढ़ी हुई कीमतों के कारण उनके मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद उन्हें अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।

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छोटे सिलेंडरों में गैस भरना पूरी तरह अवैध 

घरेलू सिलेंडरों से छोटे सिलेंडरों में गैस भरना पूरी तरह अवैध और बेहद खतरनाक है। बिना सुरक्षा मानकों और उचित उपकरणों के गैस रिफिलिंग करने से आग लगने या विस्फोट जैसी गंभीर घटनाएं हो सकती हैं। इसके बावजूद कई जगहों पर यह काम खुलेआम जारी है। छात्रों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अवैध गैस रिफिलिंग केंद्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि छात्रावासों और किराये पर रहने वाले छात्रों के लिए आसान और वैध गैस सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि उन्हें आर्थिक शोषण का सामना न करना पड़े।

बिहारशरीफ में पढाई का केंद्र

बिहारशरीफ पिछले तीन से चार दशकों में नालंदा के साथ-साथ नवादा, शेखपुरा, जमुई और लखीसराय के छात्रों के लिए एक प्रमुख शैक्षणिक केंद्र बन चुका है। यहां हजारों छात्र किराये के कमरों में रहकर पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में गैस जैसी बुनियादी सुविधा की कमी अब एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इस अवैध कारोबार पर रोक नहीं लगाई गई तो छात्रों का आर्थिक शोषण और बढ़ सकता है। साथ ही सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कारण किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका भी बनी रहेगी।