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Bihar Love Marriage Controversy: इश्क किया तो जिंदा लाश बना दी गई!... पंचायत का तुगलकी फरमान, बेटी का जीते-जी कर दिया दाह संस्कार

Bihar Love Marriage Controversy: गांव में इंसानियत का जनाजा निकला और रिश्तों का कफन ओढ़ाकर एक जिंदा लड़की का दाह संस्कार कर दिया गया।...

Love Affair Led to Living Funeral Panchayat Shocking Taliban
जीते जी निकली अर्थी, श्मशान में फूंका- फोटो : reporter

Bihar Love Marriage Controversy: बिहार के मुजफ्फरपुर से इंसानियत को शर्मसार करने वाली ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने कानून, समाज और सभ्यता तीनों के चेहरे पर कालिख पोत दी है। इश्क करने की ऐसी सजा शायद ही किसी ने सुनी होगी। मड़वन प्रखंड के जियन खुर्द गांव में पंचायत ने ऐसा तुगलकी फरमान सुनाया कि एक जिंदा बेटी को कागजों और रस्मों में मुर्दा बना दिया गया। जिस बेटी ने अपनी मर्जी से मोहब्बत की, शादी की और अपने पति के साथ जिंदगी बिताने की ख्वाहिश जताई, उसी बेटी को उसके अपने लोगों ने समाज की चौखट पर मौत का पैगाम थमा दिया। पंचायत के कथित रहनुमाओं ने फरमान सुनाया “अगर समाज में वापस इज्जत चाहिए, तो बेटी को हमेशा के लिए मरा हुआ मानना होगा।” फिर क्या था, गांव में इंसानियत का जनाजा निकला और रिश्तों का कफन ओढ़ाकर एक जिंदा लड़की का प्रतीकात्मक दाह संस्कार कर दिया गया।

पूरा मामला तब शुरू हुआ जब करीब एक महीने पहले गांव की एक युवती अपने प्रेमी के साथ घर छोड़कर चली गई। परिवार ने इसे इज्जत पर दाग बताते हुए करजा थाने में मामला दर्ज कराया। पुलिस ने युवती को बरामद किया और कोर्ट में पेश किया। अदालत में युवती ने साफ कहा कि वह बालिग है, अपनी मर्जी से शादी की है और अपने पति के साथ रहना चाहती है। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसके परिजन ससुराल पक्ष को परेशान कर रहे हैं। कानून ने लड़की की आजादी को सही माना और उसे उसके ससुराल भेज दिया गया।लेकिन गांव की पंचायत को शायद संविधान से ज्यादा अपनी खापी हुकूमत पर भरोसा था। पंचायत ने परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया। गांव में उठना-बैठना बंद, रिश्तेदारी खत्म और सामाजिक ताने अलग। फिर पंचायत ने ऐसा फरमान-ए-जुल्म जारी किया जिसने हर संवेदनशील इंसान को झकझोर दिया। कहा गया कि जब तक परिवार अपनी बेटी को मृत घोषित कर उसका अंतिम संस्कार नहीं करेगा, तब तक उन्हें समाज में जगह नहीं मिलेगी।

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रविवार को गांव में वही हुआ, जिसे देखकर रूह कांप जाए। परिवार ने अपनी जिंदा बेटी का पुतला बनाया। उसे अर्थी पर लिटाया गया। गांव की गलियों में शव यात्रा निकाली गई। मातमी माहौल बनाया गया। श्मशान घाट में मंत्रोच्चारण के बीच पुतले को आग के हवाले कर दिया गया। यानी बेटी सांस ले रही है, जिंदा है, लेकिन समाज ने उसे मरा हुआ घोषित कर दिया।

सबसे हैरत की बात ये रही कि पूरा गांव तमाशबीन बना रहा। किसी ने सवाल नहीं उठाया कि आखिर किस कानून में लिखा है कि प्यार करने वाली लड़की का सामाजिक कत्ल कर दिया जाए? पंचायत के इस फरमान ने साफ कर दिया कि गांवों में आज भी कई जगह संविधान नहीं, बल्कि सामाजिक ठेकेदारों की हुकूमत चलती है। स्थानीय मुखिया विकास कुमार सिंह ने भी माना कि सामाजिक दबाव खत्म करने के लिए परिवार ने यह कदम उठाया। वहीं करजा थाना पुलिस अब जांच की बात कह रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या जांच उस लड़की की टूटी हुई जिंदगी को वापस लौटा पाएगी?

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यह घटना सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि उस सोच का आईना है जहां बेटी की पसंद आज भी गुनाह मानी जाती है। कानून कहता है कि बालिग को अपनी जिंदगी चुनने का हक है, लेकिन समाज के कुछ ठेकेदार अब भी मोहब्बत को ‘जुर्म’ और बेटी को इज्जत का सामान समझते हैं।

रिपोर्ट- मणिभूषण शर्मा