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Bihar MLA Controversy: पोस्ट से भड़के भाजपा विधायक! बीच सड़क इंसाफ या दबंगई?‘कानून हाथ में लेने का हक किसने दिया?’माननीय पर मारपीट के आरोप से बिहार की राजनीति गरमाई

Bihar MLA Controversy: मुकुंद ने कानून तोड़ा था तो क्या विधायक को खुद सजा देने का हक मिल जाता है? क्या एक जनप्रतिनिधि को कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत संविधान देता है?

Bihar MLA Controversy
सत्ता का नशा या कानून का डर खत्म?- फोटो : Hiresh Kumar

Bihar MLA Controversy:बिहार की सियासत में उस वक्त सनसनी फैल गई जब मुजफ्फरपुर से सत्ता के रसूख और कथित दबंगई का एक ऐसा मामला सामने आया जिसने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तहलका मचा दिया। मुजफ्फरपुर से सामने आई एक सनसनीखेज घटना ने बिहार की सियासत में भूचाल ला दिया है। सोशल मीडिया पर की गई एक कथित आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर बीजेपी विधायक रंजन कुमार और स्थानीय युवक मुकुंद तिवारी के बीच ऐसा टकराव हुआ कि मामला सीधे मारपीट, सिर फूटने और पुलिस केस तक जा पहुंचा। इस पूरे बवाल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक माहौल गर्मा गया है।नगर विधायक रंजन कुमार और स्थानीय युवक मुकुंद तिवारी के घर पहुंच गए , मारपीट हुई, फेसबुक पोस्ट को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते मारपीट, खून-खराबे और पुलिस केस तक पहुंच गया। अब इस पूरे कांड का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है।लेकिन इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि अगर मुकुंद ने कानून तोड़ा था तो क्या विधायक को खुद सजा देने का हक मिल जाता है? क्या एक जनप्रतिनिधि को कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत संविधान देता है? अगर आपत्तिजनक पोस्ट थी तो थाने और अदालत का रास्ता खुला था, फिर समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचने की जरूरत क्यों पड़ी?

आरोप है कि नगर विधायक रंजन कुमार अपने दर्जनों समर्थकों के साथ युवक मुकुंद तिवारी के घर और दुकान पर पहुंचे और वहां जमकर हंगामा हुआ। पीड़ित मुकुंद का दावा है कि विधायक ने आते ही उससे सवाल किया   “हमारे खिलाफ क्या लिखता है?” इसके बाद गाली-गलौज शुरू हुई और फिर मारपीट में उसका सिर फोड़ दिया गया। युवक ने आरोप लगाया कि उसका मोबाइल तोड़ दिया गया और सोने की चेन भी छीन ली गई।

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हालांकि विधायक रंजन कुमार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मुकुंद लगातार सोशल मीडिया पर उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहा था। विधायक का कहना है कि कई बार समझाने के बावजूद युवक नहीं माना और निजी टिप्पणियों के जरिए चरित्र हनन करता रहा। विधायक ने यह भी दावा किया कि उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई थी।

घटना के बाद दोनों पक्षों की तरफ से एफआईआर दर्ज कराई गई है। पुलिस वायरल वीडियो और सीसीटीवी फुटेज की जांच में जुटी है। वहीं विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमला तेज कर दिया है। फिलहाल बिहार की राजनीति में यह मामला पोस्ट बनाम पावर की लड़ाई बन चुका है, जिसमें अब सबकी नजर पुलिस कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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इल्जाम है कि बीजेपी विधायक रंजन कुमार अपने 50 से 60 समर्थकों के साथ कनहौली निवासी मुकुंद तिवारी के घर और दुकान पर पहुंचे, जहां पहले गाली-गलौज हुई और फिर लाठी-डंडों से हमला कर दिया गया। मुकुंद का दावा है कि विधायक ने आते ही पूछा  “हमरे खिलाफ क्या लिखता है?” और इसके बाद समर्थकों ने उसे बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। हमले में उसका सिर फट गया, मोबाइल तोड़ दिया गया और सोने की चेन छीन लेने का भी आरोप लगाया गया है। घायल युवक की तस्वीरें और वीडियो अब इंटरनेट पर वायरल हैं, जिसने पूरे मामले को और संगीन बना दिया है।

दूसरी तरफ विधायक रंजन कुमार ने खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा कि मुकुंद लगातार सोशल मीडिया पर उनकी सियासी और निजी छवि खराब करने की साजिश कर रहा था। विधायक का आरोप है कि युवक ने उन्हें जान से मारने और AK-47 से भून देने तक की धमकी दी थी। इसी मामले में पहले मुकुंद पर एफआईआर हुई, गिरफ्तारी हुई, लेकिन कुछ घंटों बाद कोर्ट से उसे बेल मिल गई।

अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि अगर मुकुंद ने कानून तोड़ा था तो पुलिस ने कार्रवाई कर दी, लेकिन विधायक पर कब शिकंजा कसेगा? क्या सत्ता की हनक में कानून को जेब में रखने की कोशिश हुई? विपक्ष ने भी इस मामले को लपक लिया है। तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर एनडीए सरकार और पुलिस कार्रवाई पर सवाल दाग दिए हैं।

फिलहाल दोनों पक्षों की तरफ से एफआईआर दर्ज हो चुकी है। पुलिस वायरल वीडियो और सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। लेकिन इस हाई-वोल्टेज सियासी बवाल ने बिहार की राजनीति में नया तूफान जरूर खड़ा कर दिया है।