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Bihar Laborers Died: राजस्थान में फैक्ट्री अग्निकांड में 5 बिहारी मजदूरों की मौत, CM नीतीश ने किया 2-2 लाख मुआवज़े का ऐलान

भिवाड़ी स्थित खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में केमिकल फैक्ट्री में लगी भीषण आग में सात मजदूरों की मौत हुई, जिनमें पांच बिहार के मोतिहारी के रहने वाले थे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए इसे अत्यंत दुखद बताया है।

Rajasthan Factory Fire 5 Bihar Workers Killed declaration of
फैक्ट्री अग्निकांड में 5 बिहारी मजदूरों की मौत, CM नीतीश ने किया मुआवज़े का ऐलान - फोटो : reporter

Bihar Laborers Died: राजस्थान के भिवाड़ी स्थित खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में केमिकल फैक्ट्री में लगी भीषण आग ने एक बार फिर प्रवासी मजदूरों की हिफाज़त पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इस दर्दनाक हादसे में सात मजदूरों की मौत हुई, जिनमें पांच बिहार के मोतिहारी के रहने वाले थे। हादसे की खबर मिलते ही सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई और पूर्वी चंपारण में मातम का माहौल पसर गया।

मृतकों की शिनाख्त सूजंत सिंह (पिता शिव पासवान), मिंटू (पिता शिकंदर पासवान), अजित (पिता सुरेंद्र पासवान) और रवि (पिता राजदेव) के रूप में हुई है। प्रशासन के मुताबिक शव पूरी तरह जल चुके हैं, लिहाज़ा डीएनए टेस्ट के बाद ही पार्थिव शरीर परिजनों को सौंपे जाएंगे। यह मंजर न सिर्फ इंसानी त्रासदी है, बल्कि श्रमिक सुरक्षा कानूनों और फैक्ट्री निगरानी व्यवस्था पर भी करारा तमाचा है।

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घटना पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए इसे अत्यंत दुखद बताया है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के आश्रितों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 2-2 लाख रुपये अनुग्रह अनुदान देने का निर्देश दिया है। साथ ही नई दिल्ली स्थित स्थानिक आयुक्त को राजस्थान सरकार से समन्वय कर पार्थिव शरीर बिहार लाने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का हुक्म दिया गया है।

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हादसे में मनु पासवान, नितेश कुमार, कन्हैया पासवान, आशिक पासवान और दीपलाल कुमार गंभीर रूप से घायल हुए हैं। ये सभी मोतिहारी के हराज टोला नारायणपुर, चिरैया के निवासी बताए जा रहे हैं। उनका इलाज जारी है।

यह हादसा केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि मजदूरों की सुरक्षा, प्रवासी नीति और औद्योगिक निगरानी की नाकामी का मसला बनता जा रहा है। विपक्ष जहां जवाबदेही तय करने की मांग उठा सकता है, वहीं सरकार राहत और समन्वय के जरिए हालात संभालने की कोशिश में जुटी है।

बार-बार देश के अलग-अलग हिस्सों में फैक्ट्री हादसों में बिहार के मजदूरों की मौत ने यह सवाल फिर जिंदा कर दिया है क्या मेहनतकशों की जान की कीमत सिर्फ मुआवज़े तक सीमित रह जाएगी, या सियासत इस त्रासदी से कोई सबक लेगी?

रिपोर्ट- हिमांशु कुमार