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Bihar News: रात में ढलाई,सुबह सड़कों में दरारों का जाल,22 करोड़ की सड़क चौड़ीकरण योजना पर सवाल, बिहार में विकास या मजाक?

Bihar News: सड़क चौड़ीकरण और नाला निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है...

Motihari Road Project Scam Allegations Cracks Emerge After N
बिहार में विकास या मजाक?- फोटो : reporter

Bihar News:मोतीहारी के अरेराज स्थित सोमेश्वरनाथ महादेव नगरी में चल रहे सड़क चौड़ीकरण और नाला निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह विकास कार्य कागजों पर भले ही चमकदार दिखता हो, लेकिन जमीनी हकीकत पूरी तरह उलट है। आईटीआई कॉलेज से जनेरवा तक करीब 22 करोड़ रुपये की लागत से हो रहे इस प्रोजेक्ट में भारी अनियमितताओं की बात सामने आ रही है।

आरोप है कि नाले की ढलाई रात के समय की जा रही है और सुबह होते ही उसकी सतह पर दर्जनों दरारें दिखाई देने लगती हैं, मानो सूखी जमीन में जाल बिछ गया हो। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस्तेमाल हो रही निर्माण सामग्री की गुणवत्ता बेहद खराब है, जिससे ढलाई के तुरंत बाद ही दरारें पड़ जा रही हैं। कई जगह तो स्थिति यह है कि सुबह दरारें देखकर मजदूरों द्वारा तुरंत पैचिंग कर उसे ढकने की कोशिश की जाती है और काम आगे बढ़ा दिया जाता है।

दुकानदारों और स्थानीय निवासियों ने इस पूरे निर्माण कार्य पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जिस तरह का निर्माण हो रहा है, वह कुछ ही महीनों में ध्वस्त हो सकता है और यह सरकारी धन की सीधी बर्बादी है। लोगों ने यहां तक आरोप लगाया है कि यह स्थिति बिहार में पहले से चर्चा में रहे घटिया निर्माण और पुल गिरने जैसी घटनाओं की याद दिलाती है।

इस मामले में पथ निर्माण विभाग के जूनियर इंजीनियर ने भी स्वीकार किया है कि तस्वीरों में दिख रही दरारें गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने बताया कि मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों और कार्यपालक अभियंता को दे दी गई है और संवेदक के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

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वहीं दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इस निर्माण कार्य की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराई जाए तो बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और लापरवाही का खुलासा हो सकता है। धार्मिक नगरी अरेराज में हो रहे इस निर्माण कार्य को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और गुणवत्ता पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। यह मामला एक बार फिर सरकारी विकास योजनाओं की जमीनी हकीकत और निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।

रिपोर्ट- हिमांशु कुमार