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Bihar Poison Liquor Case:मोतिहारी जहरीली शराब कांड में बड़ा एक्शन, 10 मौतों के बाद सरकार का कड़ा प्रहार, लापरवाही पर 14 अफसर निलंबित

Bihar Poison Liquor Case: जहरीली शराब कांड को लेकर मधनिषेध विभाग ने ऐसा सख्त कदम उठाया है, जिसने पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया है। ..

Motihari Liquor Tragedy 14 Officers Suspended After 10 Death
मोतिहारी जहरीली शराब कांड में बड़ा एक्शन- फोटो : reporter

Bihar Poison Liquor Case: जहरीली शराब कांड को लेकर मधनिषेध विभाग ने ऐसा सख्त कदम उठाया है, जिसने पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया है। शराबबंदी कानून को लेकर लगातार सवालों के घेरे में रहे विभाग ने अब बड़ी कार्रवाई करते हुए मोतिहारी में उत्पाद थाना और मोबाइल टीम में तैनात 14 उत्पाद पुलिस पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक गलियारों में सनसनी फैल गई है और विभागीय अधिकारियों के बीच बेचैनी साफ देखी जा रही है।

बताया जा रहा है कि अप्रैल 2026 में पूर्वी चंपारण जिले के रघुनाथपुर और तुरकौलिया थाना क्षेत्र के परसौना, गदरिया और बालगंगा गांवों में संदिग्ध परिस्थितियों में 10 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। कई अन्य लोग भी गंभीर रूप से बीमार पड़े थे। शुरूआती जांच में मामला जहरीली शराब से जुड़ा माना गया, लेकिन बाद में मध्यनिषेध विभाग की जांच में यह साफ हो गया कि मौतें जहरीली स्प्रिट पीने की वजह से हुई थीं। इस खुलासे के बाद प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

सरकार के संयुक्त सचिव स्तर से की गई समीक्षा में उत्पाद पुलिस की बड़ी लापरवाही उजागर हुई। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि जनवरी से मार्च 2026 तक अवैध स्प्रिट और शराब तस्करी से जुड़ा एक भी मुकदमा दर्ज नहीं किया गया था। इतना ही नहीं, शराब माफियाओं के नेटवर्क को ध्वस्त करने, खुफिया जानकारी जुटाने और तस्करों की गिरफ्तारी में भी टीम पूरी तरह नाकाम साबित हुई। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, इसी सुस्ती और गैर-जिम्मेदाराना रवैये की वजह से शराब माफियाओं के हौसले बुलंद होते गए।

मधनिषेध मुख्यालय ने पहले सभी संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया था। हालांकि, पदाधिकारियों द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को अनुशासनिक प्राधिकार ने असंतोषजनक माना और उसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद सहायक अवर निरीक्षक से लेकर निरीक्षक स्तर तक के कुल 14 अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई को शराबबंदी कानून के प्रति सरकार की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी के तौर पर देखा जा रहा है।निलंबित किए गए अधिकारियों में निरीक्षक मनीष सर्राफ, धर्मेंद्र कुमार, मोहम्मद सेराज अहमद, अवर निरीक्षक नागेश , धर्मेंद्र झा, मुकेश कुमार, उदय कुमार समेत कई सहायक अवर निरीक्षक शामिल हैं। इन सभी का मुख्यालय अलग-अलग मद्य निषेध ग्रुप सेंटरों में तय किया गया है। कुछ को गया, कुछ को मुजफ्फरपुर, सहरसा और भागलपुर ग्रुप सेंटर भेजा गया है।

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इस बड़े एक्शन के बाद पूरे उत्पाद विभाग में खौफ और बेचैनी का माहौल है। विभागीय कर्मियों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले दिनों में और भी अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। दूसरी तरफ, मृतकों के परिजनों ने सरकार की कार्रवाई का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और शराब माफियाओं की गिरफ्तारी की मांग भी उठाई है।जहरीली शराब कांड ने एक बार फिर बिहार में शराबबंदी कानून की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि जब राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू है, तो आखिर अवैध स्प्रिट और जहरीली शराब का कारोबार किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है। फिलहाल, विभागीय कार्रवाई के बाद प्रशासन अलर्ट मोड में है और पूरे मामले की गहन जांच जारी है।

रिपोर्ट- हिमांशु कुमार