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Bihar News : खगड़िया के कुंदन स्वामी ने पेश की मानवता की मिसाल, पिता की पुण्यतिथि पर कैंसिल किया भोज, दर्जनों जरूरतमंद बेटियों को दी आर्थिक सहायता

Bihar News : खगड़िया के रहनेवाले कुंदन स्वामी ने अपने पिता की पुण्यतिथि पर भोज नहीं देकर जरूरतमंद बच्चियों की आर्थिक सहायता की........पढ़िए आगे

Bihar News : खगड़िया के कुंदन स्वामी ने पेश की मानवता की मिसा
बच्चियों को आर्थिक मदद - फोटो : SOCIAL MEDIA

KHAGARIA : जिले के महेशखूंट में समाज को नई दिशा देने वाली एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है। डॉ. विश्वनाथ अशोक आर्या चैरिटेबल ट्रस्ट के संयोजक कुंदन स्वामी ने अपने पिता, स्व. डॉ. अशोक बाबू की तीसरी पुण्यतिथि को यादगार बनाते हुए सदियों से चली आ रही मृत्यु भोज की खर्चीली परंपरा का त्याग किया। समाज में दिखावे और फिजूलखर्ची पर प्रहार करते हुए उन्होंने इस अवसर को सेवा और सशक्तिकरण के पर्व में बदल दिया।

55 बेटियों को मिला आर्थिक संबल

पिता की स्मृति को सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिए कुंदन स्वामी ने क्षेत्र की 55 असहाय और जरूरतमंद बेटियों की पहचान की। कार्यक्रम के दौरान प्रत्येक बेटी को 5,001 रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की गई। कुंदन स्वामी का मानना है कि मृत्यु भोज जैसे आयोजनों पर लाखों खर्च करने के बजाय यदि वह राशि बेटियों की शिक्षा या उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए दी जाए, तो यह समाज के लिए अधिक सार्थक होगा।

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मानव सेवा के 25 वर्षों का गौरवशाली सफर

यह ट्रस्ट, जिसे पूर्व में ‘डॉ. विश्वनाथ संघर्ष सेवा समिति’ के नाम से जाना जाता था, पिछले 25 वर्षों से निस्वार्थ भाव से समाज सेवा कर रहा है। अज्ञात शवों का ससम्मान दाह संस्कार करना हो, लावारिस घायलों का इलाज कराना हो या कड़कड़ाती ठंड में कंबल वितरण, यह संस्था मानवता की सेवा में सदैव तत्पर रहती है। इसी कड़ी में इस बार मल्लिक समाज के बीच खाद्य सामग्री का भी वितरण किया गया।

गणमान्य जनों ने की पहल की सराहना

इस नेक कार्य के साक्षी बनने के लिए समाजसेवी नागेंद्र सिंह त्यागी, इंजीनियर धर्मेंद्र कुमार और मुखिया कृष्णा कुमार यादव सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह कदम समाज के लिए एक बड़ा संदेश है। वक्ताओं ने जोर दिया कि समाज में व्याप्त कुरीतियों को केवल इसी तरह के साहसिक और सकारात्मक प्रयासों से ही खत्म किया जा सकता है।

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"बेटियों की मदद ही सच्ची श्रद्धांजलि"

समारोह के अंत में कुंदन स्वामी ने एक भावुक संदेश देते हुए कहा कि अपने पूर्वजों की याद में बेटियों की मुस्कान देखना ही सच्ची शांति है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि मृत्यु भोज की पुरानी और बोझिल परंपरा को बदलकर हमें जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। यह पहल न केवल एक परिवार की निजी श्रद्धांजलि है, बल्कि पूरे बिहार के लिए एक नई सामाजिक क्रांति की शुरुआत मानी जा रही है। 

अमित की रिपोर्ट