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Bihar success story: भूख,तन्हाई और टूटते रिश्तों से लड़कर बनीं अफसर,पढ़िए बिहार की बेटी रुचि की जज़्बे भरी दास्तान, रो देंगे

Bihar success story: बिहार की मिट्टी से उठी एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो हौसले, सब्र और जिद की मिसाल बन चुकी है।...

From Hunger to Officer khagaria
भूख,तन्हाई और टूटते रिश्तों से लड़कर बनीं अफसर- फोटो : reporter

Bihar success story: बिहार की मिट्टी से उठी एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो हौसले, सब्र और जिद की मिसाल बन चुकी है। आज रुचि मिश्रा बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के रूप में सेवा दे रही हैं, लेकिन उनकी यह पहचान किसी आसान राह का नतीजा नहीं, बल्कि संघर्ष, दर्द और उम्मीदों से भरी लंबी जद्दोजहद की कहानी है।

खगड़िया के कन्हैयाचक गांव में जन्मी रुचि मिश्रा एक ऐसे परिवार में पली-बढ़ीं जहां कभी खुशहाली और रौनक थी। परिवार का अच्छा-खासा कारोबार था और घर में किसी चीज़ की कमी नहीं थी। लेकिन वक्त की करवट ने सब कुछ बदल दिया। कारोबार डूब गया और आर्थिक हालत अचानक बुरी तरह बिगड़ गई। इसी बीच साल 2012 में एक ऐसा सदमा आया जिसने पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी। एक ही महीने के भीतर उनकी दादी आशा देवी और पिता प्रशांत मिश्रा का निधन हो गया। घर से एक साथ दो अर्थियां उठीं और परिवार का सहारा टूट गया।

हालात इतने खराब हो गए कि घर में दो वक्त की रोटी के लिए भी संघर्ष शुरू हो गया। इसी दौरान रिश्तेदारों ने सलाह दी कि रुचि पढ़ाई छोड़कर शादी कर लें। महज 14 साल की उम्र में उनकी शादी एक अमीर लेकिन अनपढ़ युवक से तय कर दी गई थी।लेकिन रुचि ने हालात के आगे घुटने टेकने से इंकार कर दिया। उन्होंने ठान लिया कि न तो बाल विवाह करेंगी और न ही अपने सपनों को अधूरा छोड़ेंगी। उन्होंने अपनी मां से कहा कि मेहनत और भरोसे के सहारे ही जिंदगी बदली जा सकती है।रुचि ने पढ़ाई जारी रखी और साथ ही घर चलाने के लिए बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। कभी स्कूल में 1500 रुपये की नौकरी, तो कभी रिसेप्शनिस्ट का काम, कभी कंप्यूटर क्लास में पढ़ाना उन्होंने हर छोटा-बड़ा काम किया, ताकि घर का खर्च और भाई-बहन की पढ़ाई जारी रह सके।

आखिरकार साल 2019 में उन्होंने दरोगा भर्ती का फॉर्म भरा। कड़ी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने पहली ही कोशिश में प्री, मेंस और फिजिकल परीक्षा पास कर ली। 26 जनवरी 2022 को उन्होंने बिहार पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के रूप में ज्वाइन किया और राजगीर में ट्रेनिंग पूरी की।आज वह मधुबनी जिले में सब-इंस्पेक्टर के रूप में तैनात हैं। उनकी मेहनत का असर यह भी हुआ कि उनकी बहन आज बिहार सरकार में शिक्षिका है और भाई इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड में इंजीनियर बन चुका है।

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रुचि मिश्रा कहती हैं कि यह सिर्फ उनकी जीत नहीं, बल्कि मां, गुरु और संघर्ष पर भरोसे की जीत है। उनकी कहानी आज हर उस युवा के लिए उम्मीद का पैगाम है जो मुश्किलों से घिरकर हार मानने की सोचता है।रुचि का संदेश साफ है “रुकना मत, झुकना मत… क्योंकि मंज़िल उन्हीं का इंतज़ार करती है जो चलते रहते हैं।

खगड़िया से अमित की रिपोर्ट