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स्कूल जाने के लिए मौत की पटरी पार करने को मजबूर मासूम, कटिहार में पटरी के बीच से निकलकर पढ़ने जाते हैं बच्चे, हर दिन हादसे का मंडराता है खतरा

Bihar News: प्राथमिक विद्यालय नहीं होने के कारण सैकड़ों मासूम रोज़ाना अपनी जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक पार कर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं।...

Katihar Kids Risk Lives Crossing Tracks Daily to Reach Schoo
मौत की पटरी पार करने को मजबूर मासूम- फोटो : reporter

Bihar News: कटिहार जिले के कोढ़ा प्रखंड की रौतारा पंचायत से बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहां प्राथमिक विद्यालय नहीं होने के कारण सैकड़ों मासूम रोज़ाना अपनी जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक पार कर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं। हालात इतने भयावह हैं कि कई बार स्टेशन पर मालगाड़ी या अन्य ट्रेन लंबे समय तक खड़ी रहने पर बच्चे ट्रेन के नीचे से गुजरकर दूसरी ओर पहुंचते हैं। यह दृश्य न सिर्फ डराने वाला है, बल्कि किसी बड़े हादसे की आशंका को भी लगातार बढ़ा रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, रौतारा रेलवे स्टेशन पर फुट ओवरब्रिज तो बना है, लेकिन उससे जुड़ने वाला संपर्क मार्ग सुविधाजनक नहीं है। वहीं रेलवे फाटक भी काफी दूर पड़ता है। ऐसे में समय बचाने के लिए अधिकांश बच्चे और ग्रामीण सीधे रेलवे लाइन पार करना ही बेहतर समझते हैं। यही लापरवाही नहीं, बल्कि मजबूरी हर दिन उनकी जिंदगी को खतरे में डाल रही है।

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रौतारा पंचायत के पूर्वी हिस्से में मंडल टोला, भूमिहीन कॉलोनी, साह टोला, बरकत चौक, याकूब टोला, आदिवासी टोला, हाजी टोला, शेख टोला, पासवान टोला, बंगाली ब्राह्मण टोला, मतपोखर और धनगामा समेत कई बस्तियां हैं। इन इलाकों में बड़ी आबादी निवास करती है, लेकिन प्राथमिक विद्यालय नहीं होने के कारण छोटे-छोटे बच्चों को पढ़ाई के लिए रेलवे ट्रैक पार कर रौतारा माध्यमिक विद्यालय जाना पड़ता है।

ग्रामीण मोहम्मद नसीरुद्दीन और आशीष कुमार मिश्रा का कहना है कि यदि पंचायत के पूर्वी हिस्से में प्राथमिक विद्यालय की स्थापना कर दी जाए तो बच्चों को रोज़ाना जान हथेली पर रखकर रेलवे लाइन पार नहीं करनी पड़ेगी।वहीं छात्राएं नाजिया परवीन और सायना परवीन बताती हैं कि फुट ओवरब्रिज होने के बावजूद उस पर चढ़ना-उतरना कठिन है, इसलिए अधिकांश बच्चे सीधे पटरी पार करते हैं। कई बार मालगाड़ी खड़ी रहने पर ट्रेन के नीचे से निकलना उनकी मजबूरी बन जाता है।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते प्राथमिक विद्यालय और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था नहीं की, तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। यह केवल शिक्षा का सवाल नहीं, बल्कि मासूम बच्चों की सुरक्षा और जीवन से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है।


रिपोर्ट- श्याम कुमार सिंह