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Bihar News: CJI सूर्यकांत को राखी बांधने वाली इस लड़की का बिहार से क्या है रिश्ता? जिसे मुख्य न्यायाधीश ने दिया तोहफा, पढ़िए

Bihar News: बिहार की बेटी नूर आयशा खान ने देश की सबसे बड़ी अदालत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को राखी बांधकर अपने परिवार के साथ-साथ पूरे इलाके का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया

Gaya Noor Aysha Ties Rakhi to CJI Suryakant Makes History
नूर ने CJI को बांधी राखी- फोटो : reporter

Bihar News: बिहार के गया की बेटी नूर आयशा खान ने देश की सबसे बड़ी अदालत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को राखी बांधकर अपने परिवार के साथ-साथ पूरे इलाके का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। कभी घोर नक्सल प्रभावित माने जाने वाले गया जिले के इमामगंज के कोठी थाना क्षेत्र से आने वाली नूर आयशा के लिए यह सिर्फ राखी बांधने का मौका नहीं, बल्कि जिंदगी का ऐसा यादगार लम्हा बन गया, जिसे वह ताउम्र अपने दिल में संजोकर रखेंगी।

देश के मुख्य न्यायाधीश को राखी बांधने का यह अवसर इमामगंज क्षेत्र की किसी बेटी के लिए पहली बार आया है। लिहाजा नूर आयशा के इस खास सम्मान की खबर सामने आते ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। गांव-इलाके के लोगों में भी इस उपलब्धि को लेकर गर्व का माहौल है। जिस इलाके की पहचान कभी नक्सली हिंसा और दहशत के साए से जुड़ी रही, उसी क्षेत्र की बेटी का देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था के मुखिया तक पहुंचना बदलाव की एक प्रेरक तस्वीर पेश करता है।

नूर आयशा दिल्ली के आरके पुरम स्थित डीपीएस स्कूल की छात्रा हैं। स्कूल की ओर से ही उन्हें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को राखी बांधने के लिए चयनित किया गया था। जब नूर ने सीजेआई की कलाई पर राखी बांधी तो यह पल उनके लिए बेहद भावुक और गौरवपूर्ण बन गया। नूर ने इस अनुभव को अपने जीवन का बेहद खास और सम्मान से भरा क्षण बताया है।

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नूर आयशा के पिता रियासत नवाज खान उर्फ छूटन खान इलाके के सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जबकि उनकी मां महरे अंगेज खानम बिकोपुर पंचायत की मुखिया हैं। बेटी को देश के मुख्य न्यायाधीश को राखी बांधने का अवसर मिलने पर माता-पिता की खुशी का ठिकाना नहीं है। परिवार के लिए यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की प्रतिष्ठा से जुड़ा गौरव बन गई है।

नूर आयशा ने जिस तरह देश की सर्वोच्च अदालत के मुख्य न्यायाधीश को राखी बांधी, उसने इमामगंज की बेटी को एक खास पहचान दी है। कभी जिस इलाके का नाम नक्सली गतिविधियों के कारण सुर्खियों में रहता था, आज उसी धरती की बेटी शिक्षा, संस्कार और सम्मान की वजह से चर्चा में है।नूर की यह तस्वीर एक बड़ा संदेश भी देती है हालात चाहे कितने ही मुश्किल क्यों न रहे हों, शिक्षा और अवसर की रोशनी नई पहचान गढ़ सकती है। इमामगंज की बेटी नूर आयशा का यह सम्मान न सिर्फ उसके परिवार की खुशी है, बल्कि गया और बिहार के लिए भी गर्व का क्षण बन गया है।

रिपोर्ट- मनोज कुमार