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Darbhanga Raj: दरभंगा राज की आख़िरी महारानी को राजसी विदाई, श्रद्धा, परंपरा और विरासत का संगम, राज्यपाल समेत देशभर के राजघराने होंगे शरीक

Darbhanga Raj: दरभंगा राज परिवार की अंतिम महारानी काम सुंदरी साहिबा के निधन के बाद पूरे विधि-विधान और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ उनका श्राद्धकर्म संपन्न कराया जा रहा है।

Darbhanga Raj: दरभंगा राज की आख़िरी महारानी को राजसी विदाई,
दरभंगा राज की आख़िरी महारानी को राजसी विदाई- फोटो : reporter

Darbhanga:  ऐतिहासिक रियासत एक बार फिर अपने अतीत, परंपरा और विरासत के साए में खड़ी है। दरभंगा राज परिवार की अंतिम महारानी काम सुंदरी साहिबा के निधन के बाद पूरे विधि-विधान और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ उनका श्राद्धकर्म संपन्न कराया जा रहा है। यह केवल एक पारिवारिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मिथिला की राजसी संस्कृति और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतिबिंब बन गया है।

श्याम मंदिर परिसर स्थित महारानी के चिता स्थल पर महाराज परिवार द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कर्मकांड किया जा रहा है। पंडितों के उच्चारित मंत्र, अग्नि और परंपरा के अनुशासन ने पूरे वातावरण को श्रद्धा और शोक से भर दिया है। वहीं दूसरी ओर, कल्याणी निवास में अतिथियों और श्रद्धालुओं के लिए राजसी आतिथ्य की भव्य तैयारियां की गई हैं, जहां परंपरा और मर्यादा का विशेष ध्यान रखा गया है।

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दरभंगा राज परिवार के कुमार कपिलेश्वर सिंह ने जानकारी दी कि दो दिनों में लगभग 50 हजार लोगों के भोजन की व्यवस्था की गई है। इसके लिए 56 भोग, पारंपरिक मिठाइयां और राजघराने के विशेष व्यंजन तैयार किए जा रहे हैं। यह आयोजन केवल भोज नहीं, बल्कि दरभंगा राज की उस तहज़ीब का प्रतीक है, जहां मेहमाननवाज़ी को सम्मान और संस्कार का दर्जा दिया जाता है।

कुमार कपिलेश्वर सिंह ने बताया कि महारानी के निधन पर देश के विभिन्न राजघरानों से प्रतिनिधि श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं। साधु-संतों का भी दूर-दराज़ से आगमन हो रहा है। इस ऐतिहासिक अवसर पर बिहार के राज्यपाल की उपस्थिति भी प्रस्तावित है, जिसके मद्देनज़र प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतज़ाम किए गए हैं।

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पूरे दरभंगा शहर में शोक और सम्मान का मिला-जुला माहौल है। आम लोग भी महारानी के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट कर रहे हैं। दरभंगा राज परिवार की यह अंतिम महारानी अपने साथ एक युग, एक रियासत और एक परंपरा की जीवंत स्मृतियां छोड़ गई हैं।

राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी यह क्षण खास है जहां सत्ता, संत और समाज एक साथ खड़े होकर उस विरासत को नमन कर रहे हैं, जिसने सदियों तक मिथिला की पहचान को आकार दिया। दरभंगा आज इतिहास के एक अध्याय को अश्रुपूरित आंखों से विदा कर रहा है, लेकिन उसकी गरिमा और परंपरा को पूरी शान के साथ जीवित रखे हुए है।

रिपोर्ट- वरुण ठाकुर