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Bihar News : भागलपुर के उजानी गांव में आज भी जीवंत है सती बिहुला की गाथा, उपेक्षा का शिकार बनी ऐतिहासिक जन्मस्थली

Bihar News : अंग क्षेत्र की लोक आस्था और पौराणिक विरासत से जुड़ी सती बिहुला की अमर गाथा नवगछिया की धरती पर आज भी रचती-बसती है। लेकिन पोखर आज भी उपेक्षित है....पढ़िए आगे

Bihar News : भागलपुर के उजानी गांव में आज भी जीवंत है सती बि
सती बिहुला की गाथा- फोटो : BALMUKUND

BHAGALPUR : अंग क्षेत्र की लोक आस्था और पौराणिक विरासत से जुड़ी सती बिहुला की गाथा नवगछिया की धरती पर आज भी जीवंत है। गंगा और कोसी के बीच बसे उजानी गांव को जनश्रुतियों और लोकमान्यताओं में सती बिहुला की जन्मस्थली और मायके के रूप में जाना जाता है। गांव में स्थित प्राचीन पोखर को ग्रामीण बिहुला पोखर के नाम से जानते हैं। ऐतिहासिक महत्व के बावजूद यह स्थल अब तक पर्यटन के मानचित्र पर अपनी पहचान नहीं बना सका है।

बिहुला की कथा से जुड़ा है उजानी गांव....

लोक मान्यता के अनुसार भगवान शिव की मानस पुत्री मां मनसा विषहरी को पृथ्वी लोक पर पूजा दिलाने के उद्देश्य से सती बिहुला का जन्म उजानी गांव में हुआ था। बाद में उनका विवाह भागलपुर के नाथनगर चंपानगर के प्रसिद्ध व्यापारी चंद्र सौदागर के पुत्र लखिंदर से हुआ। विवाह की पहली रात ही काला नागिन के डंसने से लखिंदर की मृत्यु हो गई। 

क्या है मान्यता

कथा के अनुसार सती बिहुला ने पति के पार्थिव शरीर को केले के थंभ से बनी मंजूषा नाव पर रखा और चंपा नदी के रास्ते देवलोक की यात्रा की। उनकी तपस्या और पतिव्रता धर्म से प्रसन्न होकर देवताओं ने लखिंदर समेत पूरे परिवार को पुनर्जीवन प्रदान किया। बिहुला की यह गाथा आज भी बिहार-झारखंड के कई हिस्सों में लोकगीतों और मंजूषा कला के माध्यम से सुनाई और दिखाई जाती है।

ग्रामीणों ने बताया

ग्रामीण छोटू कुमार ने बताया कि बिहुला पोखर और इससे जुड़े स्थलों का संरक्षण कर इसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उजानी गांव को धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन से जोड़ने पर क्षेत्र की लोक विरासत को नई पहचान मिल सकती है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन पहल करे तो बिहुला की जन्मस्थली आस्था के साथ पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बन सकती है।

NSIT
Nsmch

बालमुकुन्द की रिपोर्ट