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Bihar Land News: वाल्मीकिनगर में जमीन खेल पर सियासी विस्फोट! विधायक ने खोला मोर्चा, मुख्यमंत्री से जांच की मांग, भूमाफियाओं और अफसरों की मिलीभगत का आरोप

Bihar Land News:वाल्मीकिनगर से विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने अपने ही प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर व्यापक जांच की मांग की है।

Bihar Land News: वाल्मीकिनगर में जमीन खेल पर सियासी विस्फोट!
विधायक ने खोला मोर्चा- फोटो : reporter

Bihar Land News: बिहार की राजनीति में भूमि घोटालों और राजस्व प्रशासन की कार्यशैली को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। वाल्मीकिनगर से विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने अपने ही प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर व्यापक जांच की मांग की है। विधायक के आरोपों ने बगहा और वाल्मीकिनगर क्षेत्र की राजनीति में हलचल मचा दी है, क्योंकि मामला सीधे तौर पर भूमि विवाद, दाखिल-खारिज और सरकारी कार्यालयों में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है।

विधायक ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि वाल्मीकिनगर क्षेत्र के पांचों प्रखंडों में भूमि संबंधी मामलों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हो रही हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ अंचल अधिकारियों, राजस्व कर्मियों और भूमाफियाओं की कथित मिलीभगत के कारण आम लोगों को न्याय पाने के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल से मुलाकात कर उच्चस्तरीय जांच की मांग भी की है।

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सुरेंद्र कुशवाहा का कहना है कि भूमि विवाद और दाखिल-खारिज जैसे मामलों में बड़ी संख्या में लोग जनता दरबार, लोक शिकायत निवारण केंद्र और प्रशासनिक शिविरों में पहुंचते हैं, लेकिन उनके आवेदनों को सुनवाई के बजाय डीसीएलआर कार्यालय भेज दिया जाता है। आरोप है कि इस प्रक्रिया के कारण मामलों का निपटारा महीनों और वर्षों तक लंबित रहता है, जिससे आम नागरिकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया और फाइलों के जाल में फंसाकर लोगों को परेशान किया जाता है, जिसके कारण कई लोग मजबूरी में रिश्वत देने के लिए विवश हो जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि कई मामलों में लोगों की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायतें भी सामने आई हैं और पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिल रहा है। उनके अनुसार यह स्थिति किसी एक-दो घटनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि एक संगठित तंत्र की ओर इशारा करती है।राजनीतिक तौर पर यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि विधायक ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो जनता का आक्रोश बढ़ सकता है और कानून-व्यवस्था की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है। उनके बयान को स्थानीय जनता की नाराजगी और प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति बढ़ते अविश्वास से जोड़कर देखा जा रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने भी संज्ञान लिया है। जानकारी के अनुसार बगहा के डीसीएलआर कार्यालय के कार्य प्रदर्शन की समीक्षा कराने तथा प्राप्त शिकायतों की जांच के लिए संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद सरकार क्या कदम उठाती है और क्या वास्तव में भूमि मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो पाती है।फिलहाल विधायक की इस पहल ने भूमि विवादों के मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है और प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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रिपोर्ट- धीरज पाराशर