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Bhojpur Encounter: मोमबत्तियों की लौ में उठे इंसाफ के सवाल, भरत भूषण तिवारी प्रकरण पर सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब, फर्जी एनकाउंटर के आरोपों के बीच पुलिस पर बढ़ा दबाव

Bhojpur Encounter: आरा में भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर के विरोध में हाथों में मोमबत्तियां, आंखों में सवाल और दिलों में इंसाफ की उम्मीद लिए युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक सड़कों पर उतरे।

Bhojpur Encounter: मोमबत्तियों की लौ में उठे इंसाफ के सवाल,
भरत भूषण तिवारी प्रकरण पर सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब- फोटो : reporter

Bhojpur Encounter:  पश्चिम चम्पारण के लौरिया में सोमवार की शाम सिर्फ मोमबत्तियां नहीं जलीं, बल्कि इंसाफ की मांग में सुलगता जनाक्रोश भी सड़कों पर उतर आया। भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर को लेकर लोगों के दिलों में जमा दर्द, गुस्सा और बेचैनी कैंडल मार्च के रूप में सामने आई। ब्लॉक चौक से प्रभु चौक तक निकले इस शांतिपूर्ण मार्च में सौ से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया और एक ही आवाज बुलंद की सच्चाई सामने आनी चाहिए, न्याय मिलना चाहिए। हाथों में मोमबत्तियां, आंखों में सवाल और दिलों में इंसाफ की उम्मीद लिए युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक सड़कों पर उतरे। जन सुराज के जिला सचिव अजय ठाकुर के नेतृत्व में निकले इस मार्च ने पूरे इलाके का माहौल भावुक कर दिया। हर कदम के साथ यह सवाल गूंजता रहा कि आखिर भरत भूषण तिवारी की मौत की असली हकीकत क्या है?

मार्च को संबोधित करते हुए अजय ठाकुर ने कहा कि किसी भी संवेदनशील मामले में पर्दादारी नहीं, बल्कि पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए ताकि सच और झूठ के बीच का फासला खत्म हो सके। साथ ही पीड़ित परिवार को न्याय, सुरक्षा और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई।

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इस मामले ने उस समय और गंभीर मोड़ ले लिया जब भरत तिवारी के परिजनों ने पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाया। मृतक के पिता का दावा है कि भरत ने कथित रूप से हथियार फेंक दिया था, लेकिन इसके बावजूद उसे पकड़कर गोली मार दी गई। परिजनों के अनुसार उसके शरीर में चार गोलियां लगी थीं। यही आरोप अब पूरे मामले को महज एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि गंभीर जांच का विषय बना रहे हैं। घटना के बाद लोगों ने सड़क जाम कर अपना विरोध दर्ज कराया था। वहीं लगातार बढ़ते जनदबाव और सवालों के बीच बिहार पुलिस मुख्यालय को भी कार्रवाई करनी पड़ी। पुलिस मुख्यालय ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि कार्रवाई के दौरान पुलिस स्तर पर गंभीर चूक हुई थी।

एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) सुधांशु कुमार ने मीडिया से बातचीत में माना कि 16 जून को आरोपी के खिलाफ कार्रवाई के दौरान स्थिति को उचित तरीके से हैंडल नहीं किया गया। इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए संबंधित थानेदार, दो दारोगा, एक एएसआई और एक कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही पूरे मामले की निगरानी शाहाबाद प्रक्षेत्र के डीआईजी को सौंपी गई है। एडीजी ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी एनकाउंटर को पुलिस की उपलब्धि नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा की स्थिति में कानून पुलिस को सीमित अधिकार देता है, लेकिन हर मुठभेड़ की निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि यह तय हो सके कि कार्रवाई कानून के दायरे में हुई या नहीं।

सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सेवानिवृत्त न्यायाधीश से न्यायिक जांच कराने का आदेश भी दिया है। यही वजह है कि भरत भूषण तिवारी प्रकरण अब केवल एक मौत का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह न्याय, जवाबदेही और पुलिस कार्रवाई की वैधता से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है।

लौरिया की सड़कों पर जली मोमबत्तियों की लौ अब सिर्फ शोक की प्रतीक नहीं है, बल्कि उस उम्मीद की भी निशानी है कि सच चाहे जितना भी दबा हो, एक दिन सामने जरूर आएगा। लोगों का कहना है कि जब तक निष्पक्ष जांच पूरी नहीं होती और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक इंसाफ की यह आवाज थमने वाली नहीं है। भरत तिवारी की मौत ने एक परिवार को गम दिया है, लेकिन अब यह मामला पूरे समाज के लिए न्याय और जवाबदेही की परीक्षा बन गया है।

रिपोर्ट- आशीष कुमार