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Bihar News : कलयुगी पिता को कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा, जमीन बेचकर शराब पीने से रोकने पर की थी बेटे की हत्या

Bihar News : पुत्र की हत्या करने के आरोप में पिता को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. वहीँ 15 हज़ार रूपये का अर्थदंड भी लगाया है....पढ़िए आगे

Bihar News : कलयुगी पिता को कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा, ज
कलयुगी पिता को सजा - फोटो : AJAY

BEGUSARAI : जिले की अदालत ने समाज को झकझोर देने वाले एक हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए अपने ही बेटे के हत्यारे पिता को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश ऋषिकांत की अदालत ने अभियुक्त सुधीर कुमार को दोषी करार देते हुए न केवल उम्रकैद की सजा दी, बल्कि 15,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि अर्थदंड का भुगतान नहीं किया जाता है, तो दोषी को तीन महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।

घटना की जड़ें नशे की लत और पारिवारिक विवाद से जुड़ी थीं। मामले की सूचिका आभा देवी ने अदालत में बताया कि उनके ससुर सुधीर कुमार शराब और ताड़ी के नशे के लिए घर की पुश्तैनी जमीन बेचना चाहते थे। जब उनके पति आलोक कुमार उर्फ सचिन और परिवार के अन्य सदस्यों ने इसका पुरजोर विरोध किया और जमीन खरीदने वालों को भी मना कर दिया, तो अभियुक्त सुधीर कुमार रंजिश पालने लगा। इसी विवाद के चलते एक दिन जब आलोक निहत्था बैठकर भुजा खा रहा था, तब सुधीर ने धारदार हथियार से उसका गला रेतकर उसे मौत के घाट उतार दिया।

अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक संतोष कुमार ने इस मामले को साबित करने के लिए अदालत के सामने सात महत्वपूर्ण गवाह पेश किए। इस केस की सबसे बड़ी बात यह रही कि अभियुक्त के अपने सगे-संबंधियों ने ही सत्य का साथ दिया। गवाहों में अभियुक्त की पत्नी नूतन देवी, मृतक की पत्नी आभा देवी और अभियुक्त का दूसरा पुत्र अनुपम कुमार शामिल थे। अपनों के खिलाफ दी गई इन गवाहियों और डॉक्टर व अनुसंधानकर्ता के वैज्ञानिक साक्ष्यों ने आरोपी के गुनाह को संदेह से परे साबित कर दिया।

न्यायालय ने मामले की संवेदनशीलता और क्रूरता को देखते हुए 27 अप्रैल 2026 को ही सुधीर कुमार को हत्या का दोषी मान लिया था। आज सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ने कड़ी टिप्पणी करते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस फैसले के बाद अदालत परिसर में सन्नाटा पसर गया। सजा सुनाते वक्त कोर्ट ने माना कि एक पिता द्वारा रक्षक के बजाय भक्षक की भूमिका निभाना समाज के लिए एक बेहद खतरनाक मिसाल है, जिसके लिए कड़ी सजा अनिवार्य है।

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कानूनी सजा के साथ-साथ न्यायाधीश ने मानवीय पहलू का भी ध्यान रखा। कोर्ट ने सूचिका आभा देवी, जिन्होंने अपने पति को खोया है, उन्हें उचित आर्थिक मदद और मुआवजा दिलाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) को निर्देशित किया है। यह आदेश पीड़ित परिवार को न्याय के साथ-साथ पुनर्वास में भी मदद करेगा। इस फैसले की क्षेत्र में व्यापक चर्चा हो रही है और इसे शराब के दुष्प्रभावों और पारिवारिक मूल्यों के पतन के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

अजय शास्त्री की रिपोर्ट