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Bihar News: बिहार कृषि विश्वविद्यालय में घमासान! प्रोन्नति प्रक्रिया पर नियमों की अनदेखी का दावा, CAG रिपोर्ट से हुआ खुलासा

Bihar News:बिहार के शैक्षणिक जगत में बिहार कृषि विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है।...

CAS Promotion Row at BAU Sabour Sparks Major Controversy
बिहार कृषि विश्वविद्यालय में घमासान!- फोटो : reporter

Bihar News:बिहार के शैक्षणिक जगत में बिहार कृषि विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। इस बार मामला कैरियर एडवांसमेंट स्कीम  के तहत हुई प्रोन्नतियों को लेकर उठे गंभीर आरोपों से जुड़ा है, जिसने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट में दावा किया गया है कि एक शिक्षिका को नियमों की अनदेखी करते हुए प्रोन्नति दी गई है। पोस्ट में CAG रिपोर्ट का हवाला देते हुए सेवा शर्तों, योग्यता मानकों और वित्तीय प्रक्रियाओं के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं।

आरोपों के अनुसार संबंधित शिक्षिका की नियुक्ति 17 सितंबर 2012 को सहायक प्राध्यापक पद पर हुई थी। इसके बाद उन्हें 2016, 2021 और 2024 में क्रमशः AGP 7000, 8000 और 9000 के तहत प्रोन्नति दी गई। दावा किया गया है कि यह प्रोन्नति निर्धारित सेवा अवधि और योग्यता पूरी किए बिना ही दी गई। वायरल पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि शिक्षिका 2014 से 2015 के बीच लगभग 23 महीने तक अवैतनिक अवकाश पर रहीं, जिसे “ब्रेक इन सर्विस” माना जाता है। इसके बावजूद उनकी सेवा को निरंतर मानकर प्रोन्नति देने पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

इसके अलावा वर्ष 2014-15 के APAR (Annual Performance Appraisal Report) में शून्य अंक होने के बावजूद प्रोन्नति दिए जाने का भी दावा किया गया है, जिससे पारदर्शिता और नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

पोस्ट में विश्वविद्यालय प्रशासन पर जातिगत और राजनीतिक प्रभाव के आधार पर पदों के आवंटन और लाभ देने के आरोप भी लगाए गए हैं। साथ ही वर्ष 2025 में छात्र कल्याण निदेशक पद पर हुई नियुक्ति को लेकर भी विवाद उठाया गया है।हालांकि इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से भी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन मामला सामने आने के बाद शैक्षणिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और पारदर्शी जांच की मांग उठ रही है।

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बांका से चंद्रशेखर कुमार  कि रिपोर्ट