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BAU Sabour Scam: CAG रिपोर्ट से मचा हड़कंप! BAU सबौर में वित्तीय घोटाले के आरोप, राजभवन से EOU तक पहुंचा मामला

Bihar Agricultural University: एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में आ गया है। ...

BAU CAG Report Row Complaint Sen
BAU सबौर में वित्तीय घोटाले के आरोप- फोटो : reporter

Bihar Agricultural University:  एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में आ गया है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में सामने आए कथित वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक गड़बड़ियों ने पूरे शिक्षा और कृषि प्रशासनिक तंत्र में हलचल मचा दी है। मामला अब राजभवन से लेकर निगरानी विभाग और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) तक पहुंच चुका है।

सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय पर सरकारी धन के दुरुपयोग, नियम विरुद्ध भुगतान और वित्तीय अनुशासन की अनदेखी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों को लेकर डायनामिक इंडिया ग्रुप (ट्रस्ट), बांका ने राज्यपाल सह कुलाधिपति को विस्तृत शिकायत भेजकर उच्चस्तरीय जांच और FIR दर्ज करने की मांग की है।शिकायत में कहा गया है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं जो विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। आरोप है कि वर्षों से वित्तीय नियमों की अनदेखी की जा रही थी और सरकारी फंड का उपयोग निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत किया गया।

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पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 148 से 151 के तहत CAG को सरकारी संस्थानों के वित्तीय ऑडिट का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। ऐसे में यदि रिपोर्ट में फर्जी भुगतान, टेंडर गड़बड़ी या धन के दुरुपयोग के संकेत मिलते हैं तो संबंधित अधिकारियों पर Prevention of Corruption Act और अन्य वित्तीय कानूनों के तहत कार्रवाई जरूरी हो जाती है।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है और गंभीर अनियमितताओं को दबाने की कोशिश की जा रही है। यह भी कहा गया है कि कुछ प्रभावशाली अधिकारियों को बचाने के लिए जांच प्रक्रिया को धीमा किया गया है।मामले में मांग की गई है कि CAG रिपोर्ट में दर्ज सभी वित्तीय अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच हो,दोषी अधिकारियों पर FIR दर्ज की जाए,सरकारी राशि की रिकवरी सुनिश्चित की जाए, विश्वविद्यालय की पूरी कार्यप्रणाली का विशेष ऑडिट कराया जाए,जिम्मेदारी तय कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए,इस शिकायत की प्रतिलिपि राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, कृषि विभाग, शिक्षा विभाग, निगरानी विभाग, EOU, UGC सहित कई प्रमुख संस्थाओं को भेजी गई है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर हलच तेज हो गई है।फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों के अनुसार राजभवन और उच्च स्तर पर रिपोर्ट पहुंचने के बाद फाइलों की समीक्षा शुरू कर दी गई है।शिक्षा और प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि CAG रिपोर्ट में उठाए गए सवाल बेहद गंभीर होते हैं और यदि इनकी स्वतंत्र जांच होती है तो इससे न सिर्फ दोषियों की जवाबदेही तय होगी बल्कि संस्थागत पारदर्शिता भी मजबूत होगी।

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अब पूरे मामले पर निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसियां और सरकार इस कथित वित्तीय गड़बड़ी पर क्या सख्त कदम उठाती हैं और क्या यह मामला सिर्फ फाइलों तक सीमित रहता है या वास्तव में कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ता है।

रिपोर्ट: चंद्रशेखर