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Bihar News : बांका के अमरपुर नगर पंचायत अध्यक्ष रीता साह के खिलाफ दर्ज हुई शिकायत, पद के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता का लगा आरोप

Bihar News : अमरपुर नगर पंचायत की वर्तमान अध्यक्ष रीता साह के खिलाफ पद के दुरुपयोग, कथित वित्तीय अनियमितता तथा निर्वाचन नियमों के गंभीर उल्लंघन के आरोपों को लेकर जिला प्रशासन से लिखित शिकायत की गई है।

Bihar News : बांका के अमरपुर नगर पंचायत अध्यक्ष रीता साह के
अनियमितता का आरोप - फोटो : CHANDRASHEKHAR

BANKA : जिले के अमरपुर नगर पंचायत की राजनीति इन दिनों एक नई चर्चा और विवाद के केंद्र में आ गई है। नगर पंचायत की वर्तमान अध्यक्ष रीता साह के खिलाफ पद के दुरुपयोग, कथित वित्तीय अनियमितता तथा निर्वाचन नियमों के उल्लंघन के गंभीर आरोपों को लेकर जिला प्रशासन से शिकायत की गई है। शिकायत सामने आने के बाद नगर क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार एक स्थानीय निवासी ने जिला पदाधिकारी सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी, बांका को लिखित आवेदन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। 

शिकायतकर्ता का आरोप है कि नगर पंचायत अध्यक्ष ने अपने पद और प्रभाव का उपयोग करते हुए होल्डिंग टैक्स की वास्तविक देय राशि में कथित रूप से अवैध कटौती कर भुगतान कराया, जिससे नगर पंचायत के राजस्व को नुकसान पहुंचा है। शिकायत में यह भी सवाल उठाया गया है कि यदि किसी जनप्रतिनिधि को नियमों से इतर विशेष राहत या छूट मिलती है, तो फिर आम नागरिकों के लिए बनाए गए नियमों का क्या औचित्य रह जाता है। नगर क्षेत्र में अब लोग यह चर्चा करते दिखाई दे रहे हैं कि "क्या नियम केवल आम जनता के लिए हैं और जनप्रतिनिधियों के लिए अलग व्यवस्था?"

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आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि बिना निर्धारित प्रक्रिया, सक्षम स्वीकृति और कानूनी प्रावधानों के होल्डिंग टैक्स में कटौती की गई है, तो यह केवल राजस्व हानि का मामला नहीं बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। मामले का दूसरा और अधिक संवेदनशील पहलू वर्ष 2022 के नगर निकाय चुनाव से जुड़ा हुआ है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि चुनाव के दौरान निर्वाचन विभाग के समक्ष प्रस्तुत शपथ-पत्र में कथित रूप से गलत एवं भ्रामक जानकारी दी गई थी। यदि जांच में यह आरोप सही साबित होता है, तो यह निर्वाचन नियमों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़े कर सकता है। जनप्रतिनिधियों से सदैव यह अपेक्षा की जाती है कि वे न केवल कानून का पालन करें, बल्कि अपने आचरण से जनता के लिए उदाहरण भी प्रस्तुत करें। ऐसे में यदि लगाए गए आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्थानीय निकायों में पारदर्शिता और जवाबदेही की व्यवस्था पर भी बहस को जन्म देगा।

शिकायत की प्रतिलिपि नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव, भागलपुर प्रमंडल आयुक्त कार्यालय तथा कार्यपालक पदाधिकारी, अमरपुर नगर पंचायत को भी भेजी गई है, जिससे यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता इस मामले को गंभीरता से उठाने के पक्ष में हैं। फिलहाल नगर पंचायत अध्यक्ष अथवा प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई और संभावित जांच पर टिकी हुई हैं। यदि जांच होती है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला महज़ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप है या फिर वास्तव में नगर प्रशासन के गलियारों में कुछ ऐसा हुआ है, जिसकी जवाबदेही तय होना आवश्यक है। "अब देखना यह है कि जांच की फाइल भी उतनी ही तेजी से चलेगी, जितनी तेजी से आरोपों की चर्चा शहर की गलियों से लेकर चौक-चौराहों तक पहुंच चुकी है।" हालाँकि अध्यक्ष के प्रतिनिधि राजेश साह ने आरोप का खंडन करते हुए इसे पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। 

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चंद्रशेखर भगत की रिपोर्ट